युवाओं में जोश, कर्मियों में जुनून भर गए बिपिन रावत
युवा लेफ्टिनेंट अपने मार्गदर्शक की कहानी बताकर भावुक हो उठे
गुरवलिया बाजार (कुशीनगर)। भारत के पहले (सीडीएस) चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत हेलिकॉप्टर क्रैश में इस दुनिया से चले गए, लेकिन देश के युवाओं, विभाग के लोगों में अलग छाप छोड़ गए। वह लंबे समय तक सभी के जेहन में रहेंगे। एक तरफ उनके जाने का गम लोगों का मन दुखित कर रहा है, वहीं, दूसरी तरफ देश के प्रति उनकी सेवा मन में साहस भी पैदा कर रही है। उनके सानिध्य में सेवा देने वाले कुछ सैनिकों एवं पूर्व सैनिकों ने अपनी यादें साझा कीं।
किशुन देवपट्टी निवासी पूर्व सैनिक अरविंद शुक्ला बताते हैं कि जब थलसेना में ड्यूटी में था, तब एक और घटना बिपिन रावत के साथ हुई थी। उसमें वह बाल-बाल बचे थे। उन्होंने हमें प्रेरित किया। सैनिक से सेवानिवृत्त होने के बाद भी देश के लिए काम कर रहा हूं। मेरी यादों में एक शब्द है फौजी कभी पीछे नहीं हटते। अंतिम समय तक देश के लिए जीकर हम लोगों को अकेला कर गए।
वर्तमान में एसएसबी में तैनात युवा लवकुश निवासी रत्नाकर मिश्र कहते हैं कि बिपिन रावत का जाना स्तब्ध कर गया। क्या कहूं, कैसे कहूं? हम लोगों के ऐसे नेतृत्वकर्ता, जिन्होंने देश के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देकर झकझोर गए, मन सूना हो गया। उनकी कार्यशैली ही बताती है कि उन्होंने देश के पहले सीडीएस के रूप में हम युवाओं का अप्रत्यक्ष साथ दिया।
नौसेना में तैनात मंगेश विश्वकर्मा ने कहा कि जब से उन्होंने तीनों सेनाओं की कमान संभाली थी, तब से कुछ प्रेरणाप्रद करते रहते थे। दिल्ली में एक सेरेमनी में प्रतिभाग किया था। वहां उनसे मुलाकात हुई तो सभी के मन में देश के प्रति सकारात्मक जोश पैदा कर गए।
पूर्व मेजर जगन्नाथ यादव कहते हैं कि सीडीएस साहब का जाना मन को अशांत कर गया। मैं अपने परिवार में लोगों को उनके विचारों और भावनाओं को बताकर प्रेरित करता था। नजदीक से प्रत्यक्ष नहीं मिला, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से एक असल फौजी को कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की झलक मिली।
युवा लेफ्टिनेंट कुशाग्र, बिपिन रावत के मार्गदर्शन को बताकर हुए भावुक
युवा लेफ्टिनेंट कुशाग्र ने जब इंडिया टॉप किया तो बिपिन रावत ने केवल पीठ ही नहीं थपथपाई, बल्कि उनके मन में अपनी छाप भी छोड़ गए। बिपिन रावत विभाग के लोगों से प्रत्यक्ष रूप से कितना जुड़े थे, इसका सहज उदाहरण भेलया-चंद्रौटा के कुशाग्र हैं। जब बिपिन रावत के निधन की खबर के विषय में कुशाग्र से बातचीत करने का प्रयास किया गया तो वह भावुक हो उठे। बताया कि सर से मुलाकात से उन्हें काफी आत्मबल मिला। उन्होंने पीठ थपथपाई और कहा, बेटा शाबाश, तो पिता के सपने पूरे होते दिखाई दिए। आंखें नम हो गईं। उनकी उस स्मृति को मेरे जेहन से जीवनपर्यंत दूर नहीं किया जा सकता। हमने उनसे काफी कुछ सीखा है। वह जब तीनों सेना के पहले प्रमुख हुए तो मैं भी कायल हो गया। लगा न था कि बिपिन सर इतने जल्दी हम लोगों को छोड़ जाएंगे।