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कोरोना ने रामलीला मैदान में दशहरा मेला के आयोजन को रोका

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कोरोना ने रामलीला मैदान में दशहरा मेला के आयोजन को रोका
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- नगर के रामलीला मैदान में हर साल विजय दशमी को लगता है दशहरा मेला
- आयोजकों को नहीं मिली मेला आयोजन की अनुमति
फोटो है।
संतोष वर्मा (संवाद)
पडरौना (कुशीनगर)। वर्ष 1835 के पूर्व से पडरौना के रामलीला मैदान में लगने वाले दशहरा मेला की परंपरा इस साल टूटती नजर आ रही है। क्योंकि शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने किसी भी प्रकार के मेला के आयोजन पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि पडरौना राजपरिवार के पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह दशहरा के दिन अपने परिवार के साथ पूर्व के वर्षों की भांति नीलकंठ पक्षी उड़ाने के लिए मौजूद रहेंगे।
पडरौना के दशहरा मेला के आयोजक एवं पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह के चचेरे भाई अनिल प्रताप नारायण सिंह बताते हैं कि उनके पूर्वज राजा उदित नारायण सिंह ने वर्ष 1835 में अपने महल में ठाकुरजी की मूर्ति की स्थापना कराई थी। उसके पहले से यहां रामलीला एवं दशहरा मेला का आयोजन होता है।
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राजदरबार के सामने हर साल लगने वाला दशहरा का मेला सदियों पुराना है। वर्ष 1835 के पहले पडरौना के तत्कालीन राजा उदित नारायण सिंह ने इस परंपरा की शुरुआत की थी। उसे पडरौना का राजघराना पीढ़ी दर पीढ़ी आयोजित करते आ रहा है। रावण का विशाल पुतला और घंटों तक चलने वाली आतिशबाजी इस मेले का मुख्य आकर्षण होती है। रावण का पुतला भी बनाने वाले करीगरों में अधिकतर मुस्लिम होते हैं। राजा जगदीश नारायण सिंह और बृजनारायण सिंह के समय में इस मेले को भव्यता मिली। यह परंपरा तभी से चली आ रही है, लेकिन इस साल कोरोना महामारी के चलते शासन-प्रशासन ने दशहरा मेला के आयोजन पर भी रोक लगा रखी है।
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आयोजक अनिल प्रताप नारायण सिंह ने बताया कि दशहरा मेला आयोजन को लेकर उन्होंने एसडीएम सदर से मुलाकात की थी, लेकिन उन्होंने निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए दशहरा मेला न कराए जाने की सलाह दी है। इसके बाद एडीएम विंध्यवासिनी राय से भी मिले, लेकिन उन्होंने भी यही बताया कि कोरोना महामारी को देखते हुए दशहरा मेला पर पूरी तरह रोक है। इसलिए इस साल दशहरा मेला का आयोजन नहीं होगा।
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