पडरौना। कड़ाके की ठंड ने जहां लोगों की परेशानी बढ़ानी शुरू कर दी है। वहीं इसकी वजह से लोग बीमार भी पड़ रहे हैं। खांसी, जुकाम, बुखार तो आम है। वहीं ठंड से अर्टिकेरिया (त्वचा संबंधी रोग) के रोगी बढ़ रहे हैं। शरीर पर लाल चकत्ते से लोगों का बुरा हाल है। बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्ग तक इस रोग की चपेट में हैं। मेडिकल कॉलेज के अलावा निजी अस्पतालों में भी इस तरह के मरीज उपचार कराने पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि गर्म कपड़ों में एलर्जी वाले कीटाणु पनप रहे हैं। इसके चलते शरीर पर लाल चकत्ते पड़ रहे हैं। सर्दियों के दिनों में गर्म कपड़ों की धुलाई के बाद उन्हें धूप में जरूर रखें।
दिसंबर के अंतिम सप्ताह में कुशीनगर जिले में कड़ाके की ठंड पड़नी शुरू हो गई है। दो दिनों तक सूरज की लुका-छिपी का सिलसिला भी जारी है। धूप न निकलने से गर्म कपड़ों में एलर्जी वाले कीटाणु पनप रहे हैं जो शरीर की त्वचा को नुकसान पहुंचा रहे हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. ममता यादव ने बताया कि तापमान में उतार-चढ़ाव से बीमारी गंभीर होती है। सर्दियों में ही अर्टिकेरिया बीमारी का असर दिखता है। इसकी चपेट में आने से मरीज के शरीर पर लाल चकत्ते बन जाते हैं। इसके अलावा फ्रोस्ट लाइट्स बीमारी भी लोगों को परेशान कर रही है। इससे मरीज के हाथ-पैर सुन हो जाते हैं। उसमें घाव बन जाते हैं।
उन्होंने बताया कि गर्म कपड़े सर्द हवाओं से तो बचाते हैं, लेकिन थोड़ी भी लापरवाही बरती गई तो स्किन में एलर्जी की समस्या हो जाती है। गर्म कपड़े ड्राई स्किन, चकत्ते, खुजली, यहां तक कि छाले और सूजन भी पैदा कर सकते हैं। ऐसा अक्सर सही तरीके से इनकी देखभाल न करने की वजह से होता है। गंदे कपड़े, रजाई, टोपी और स्कार्फ पहनने से समस्या हो रही है। ज्यादातर लोग सर्दियों के कपड़ों में मॉथ बॉल्स का इस्तेमाल करते हैं ताकि उसमें कीड़े न लगें। नेप्थीलीन बॉल्स में केमिकल होता है, जो कपड़ों को बचाता है, लेकिन इन्हें बिना धोए पहनने से स्किन रिएक्शन हो सकते हैं।