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Kushinagar News: पिंजरे में बिना बकरी बांधे हिंसक जानवर को पकड़ने की कोशिश

Tue, 11 Feb 2025 12:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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मंसाछापर। जटहा बाजार थाना क्षेत्र के कटाई भरपुरवा गांव के पास बड़ी गंडक नदी के रेता क्षेत्र में सोमवार को पांचवें दिन भी हिंसक जानवर वन विभाग की पकड़ से दूर रहा। रविवार की रात में रेता क्षेत्र से गन्ना लादकर आ रही ट्रैक्टर-ट्राॅली के सामने हिंसक जानवर आ गया था। इसको पकड़ने में वन विभाग भी लापरवाही बरत रहा है। पिंजरा तो लगा दिया है, लेकिन अभी तक उसमें बकरी नहीं बांधी गई है। बिना बकरी की मदद से वन विभाग पिंजरे में हिंसक जानवर को फंसाने की कोशिश कर रहा है।
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कटाई भरपुरवा गांव के पास बड़ी गंडक नदी के किनारे काफी दिनों से एक हिंसक जानवर की चहलकदमी के कारण वहां के लोगों में डर का माहौल है। लोगों ने बताया कि अब तक हिंसक जानवर कई जानवरों को अपना शिकार बना चुका है और पिछले कई दिनों से रेता क्षेत्र में विचरण करता हुआ देखा जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि रविवार की रात रामवृक्ष कुशवाहा रेता क्षेत्र से अनिल बैठा का गन्ना लादकर वापस आ रहे थे कि अचानक हिंसक जानवर उनके सामने आकर खड़ा हो गया। उसे देखते ही उन्होंने शोर मचाना शुरू किया। इसके बाद गांव के हरेंद्र तथा छेदी समेत सभी ग्रामीण वहां लाठी-डंडा लेकर पहुंचे। इसके बाद जानवर वहां से भागा। वन विभाग पिछले पांच दिनों से उस क्षेत्र में कांबिंग कर हिंसक जानवर को तलाश कर रहा है। इसको पकड़ने के लिए संवेदनशील स्थान पर पिंजरा भी लगाया गया है, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण उसमें अभी तक बकरी नहीं बांधी गई है, इसके कारण लोगों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि वन विभाग लापरवाह बना हुआ है और हिंसक जानवर को पकड़ने के लिए कोई सार्थक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।


तीन दिन बाद भी पिंजरे में नहीं बांधी गई बकरी, लोगों में नाराजगी

-हिंसक जानवर को पकड़ने के लिए वन विभाग पूरी तरह लापरवाह बना हुआ है। पिंजरा तो लगा दिया गया है, लेकिन तीन दिन बाद भी बकरी नहीं बांधी गई है। लोगों का सवाल है कि जब तक बकरी नहीं बांधी जाएगी तब तक आखिर कैसे पिंजरे में हिंसक जानवर आएगा।
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-गांव वाले हिंसक जानवर को देखने की शिकायत की थी। क्षेत्र में कांबिंग की गया, लेकिन दोबारा हिंसक जानवर नहीं दिखा। इसलिए वहां पिंजरे में बकरी नहीं बांधी गई है। दोबारा हिंसक जानवर दिखेगा तो बकरी बांधी जाएगी। गांव के सरेह में वनकर्मियों की नजर है।
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- अमृता चंद, रेंजर, खड्डा
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