दुदही। सीएचसी दुदही में तैनात एएनएम और एक महिला कर्मी की लापरवाही सामने आई है। जन्म के बाद नवजात को मृत बताकर एएनएम ने पॉलीथिन में बांध दिया और परिजनों को दफनाने की सलाह दे दी। परिजनों ने दफनाने के लिए पॉलीथिन खोला तो दंग रह गए। पॉलीथिन में बच्ची की आंखें खुली थीं और उसकी शरीर में हलचल हो रही थी। परिजन दोबारा सीएचसी पहुंचे और हंगामा करने लगे। आनन-फानन प्रभारी चिकित्साधिकारी ने बच्ची को मेडिकल कॉलेज के एनआईसीयू में भर्ती कराया।
विशुनपुरा थाना क्षेत्र के बड़हरा बुजुर्ग निवासी सरिता देवी (25) पत्नी संतराज को शुक्रवार को प्रसव पीड़ा होने पर सास सोनबरसा ने दुदही सीएचसी में भर्ती कराया। दोपहर करीब दो बजे एक बच्ची पैदा हुई। आरोप है कि प्रसव के दौरान दवा के नाम पर महिला कर्मी ने 500 रुपये की मांग की थी। 150 रुपये कम होने पर उसने रुपये फेंक दिया था। परिजनों का कहना है कि बिना डॉक्टर को दिखाए ही एएनएम व महिला कर्मी ने नवजात को मृत घोषित कर दिया और दोनों ने उसे पॉलीथिन में बांध दिया। आधे घंटे तक नवजात पॉलीथिन में प्रसूता के बेड पर पड़ी रही।
स्वास्थ्य कर्मियों के कहने पर प्रसूता की सास उसे दफनाने के लिए पैदल ही बड़हरा बुजुर्ग घर पर ले गई। वहां जब दफनाने के लिए नवजात को पॉलीथिन से बाहर निकाला तो वह जिंदा मिली। नवजात की आंखें खुली थीं और उसके शरीर में हलचल हो रही थी। परिजन नवजात को लेकर सीएचसी पहुंचे और हंगामा करने लगे। उन्होंने लापरवाह कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इससे स्वास्थ्य कर्मियों के हाथ-पांव फूलने लगे। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. संदीप कुमार ने नवजात की जांच की और उसे तत्काल एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज के एनआईसीयू में भेज दिया। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. संदीप कुमार ने बताया कि नवजात छह माह में ही पैदा हो गई थी। इसके चलते स्वास्थ्यकर्मी उसे मृत समझ बैठे। हालांकि, यह लापरवाही है। इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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-इसकी जानकारी बाद में मुझे हुई है। यह एएनएम और स्टाफ नर्स की लापरवाही है। बिना डॉक्टर से जांच कराए नवजात को मृत घोषित करना गंभीर मामला है। छह माह पर ही महिला ने बच्चे को जन्म दिया था। सीएमओ के आदेश पर इसकी जांच की जा रही है। घर वाले भी एएनएम पर लापरवाही का आरोप लगाए हैं। -डॉ. संदीप कुमार सीएचसी प्रभारी दुदही
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मामला संज्ञान में आया है। छह माह में ही नवजात पैदा हुई है। शरीर में कोई हलचल न होने के कारण स्वास्थ्यकर्मी मृत समझ बैठे होंगे। कुछ देर तक इंतजार कर डॉक्टर से दिखाना चाहिए था। यह लापरवाही है। इसकी जांच कराई जाएगी। -डॉ. सुरेश पटारिया, सीएमओ