पडरौना। जिले के सीमावर्ती छोर बिहार पश्चिम चंपारण के निकट पडरौना-दुदही मार्ग पर बसे बसहिया गांव दशकों से प्रतिबंधित मांस और गौ तस्करी को लेकर चर्चा में रहा है। यहां 2017 से पहले पशुओं के मांस की बिना लाइसेंस के खुलेआम बिक्री होती थी। इसके बाद प्रदेश में स्लॉटर हाउस (बूचड़खाने) पर शिकंजा कसना शुरू हुआ तो जांच की आंच बसहिया तक पहुंची थी और फरवरी 2018 में पूरे बल के साथ पहुंचे तत्कालीन पुलिस अधीक्षक यमुना प्रसाद ने दर्जनों स्लाॅटर हाउस तुड़वाने के साथ 20 क्विंटल मांस बरामद कराया था। इसके बाद इस गांव के 16 लोगों पर गैंगस्टर की कार्रवाई की गई थी। इसके बाद भी पशु तस्करी को लेकर 2021 में पुलिस ने बसहिया गांव में रेड डाली थी। इसके बाद यहां के तस्करों ने मांस को छोड़ पशुओं की खेप को बंगाल तक पहुंचाने का सौदा करना शुरू किया। पिछले वर्ष मार्च में पुलिस को बसहिया में ही स्थानीय लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ा था, जहां गो-तस्कर को पकड़ने गई पुलिस से मारपीट कर वर्दी फाड़ी गई थी। तस्करों के तिलिस्म तोड़ने के उद्देश्य से एसपी संतोष कुमार मिश्र भी बसहिया पहुंचे थे। पडरौना कोतवाली क्षेत्र के बसहिया गांव से पशु तस्करी के कई ऐसे गिरोह का संचालन होता है। इसमें आसपास के युवा जुड़कर पशुओं की खेप को पहले निकटवर्ती बिहार की सीमा में प्रवेश कराते हैं और फिर वहां से इन्हें बंगाल ले जाया जाता है। पूर्व में पशुओं की मांस को लेकर लंबे समय से चर्चा में रहे इस गांव के कई लोगों पर गैंगस्टर की कार्रवाई 06 फरवरी 2018 को की गई थी। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक यमुना प्रसाद ने आठ थानों की पुलिस और पीएसी के साथ गांव में पहुंचकर दर्जनों बूचड़खाने बंद कराए थे। इसके बाद भी इस गांव से पशुओं की तस्करी का नया व्यवसाय शुरू हुआ, इसमें कई तस्कर मालामाल हो गए। इसी को देखते हुए और भी कम उम्र के तस्कर इसमें जुड़ते चले गए। 2021 में भी इस गांव में पुलिस ने दबिश दी थी, लेकिन 2018 के बाद किसी पुलिस अधीक्षक ने पहली बार इस गांव में पहुंचकर कार्रवाई का प्रयास किया है। 28 दिसंबर 2024 के अंक में बसहिया में ‘पशु तस्करों का संजाल...तुर्कपट्टी भी कम बदनाम नहीं ‘ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।