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Kushinagar News: एंबुलेंस खुद बीमार...अस्पताल कैसे पहुंचाएं तीमारदार

Sun, 25 Jun 2023 12:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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जिला अस्पताल में 20 मिनट इंतजार के बाद इमरजेंसी से स्ट्रेचर लेकर घायल को ले जाते घर के लोग।संवा
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एंबुलेंस का स्ट्रेचर खराब, सीटें भी टूटीं, फर्स्ट एड बॉक्स में दवाओं की कमी
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जिले में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए दौड़ रहीं 71 एंबुलेंस

संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जनपद में संचालित 108 और 102 नंबर की एंबुलेंस में अधिकतर खस्ता हालत में हैं। किसी एंबुलेंस का स्ट्रेचर खराब है तो किसी की सीट भी टूटी है। फर्स्ट एड बॉक्स में भी जरूरी दवाएं नहीं हैं। फोन करने पर आधे घंटे तक विलंब से पहुंच रही हैं, जिससे मरीजों को तड़पना पड़ रहा है।
एंबुलेंस की लेटलतीफी के कारण मरीजों को लोग एंबुलेंस का इंतजार करते थक जाने पर निजी वाहनों से लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। सरकार की तरफ से मुफ्त में अस्पताल पहुंचाने के लिए संचालित इन एंबुलेंस का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। अभी इसी महीने की तीन तारीख को फाजिलनगर क्षेत्र के बलुआ शमशेर शाही गांव के एक मरीज काे अस्पताल ले जाते समय एंबुलेंस रास्ते में खराब हो गई थी। परिजनों को एंबुलेंस को धक्का देना पड़ा था, जिसका वीडियो वायरल हुआ था। अंतत: विलंब के चलते मरीज की मौत भी हो गई थी।
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जिले में 71 एंबुलेंस 108 व 102 नंबर के संचालित हो रहे हैं। घायलों या बीमार लोगों को नजदीकी अस्पतालों पर जल्द से जल्द पहुंचाना इनकी जिम्मेदारी है, लेकिन इन दिनों रिस्पांस टाइम पर एंबुलेंस नहीं पहुंच रही हैं। कई एंबुलेंस पुरानी हो चुकी हैं, जिनकी गति काफी धीमी है। इसलिए देरी से पहुंच रही हैं। जिला अस्पताल में शनिवार को दोपहर में करीब 12 बजे मरीजों को लेकर कई एंबुलेंस पहुंचीं। गेट पर एंबुलेंस खड़ी कर ईएमटी इमरजेंसी पहुंचा और वहां से स्ट्रेचर लेकर आया, उसके बाद मरीज को इलाज के लिए ले गया। पूछने पर बताया कि एंबुलेंस पुरानी हो चुकी हैं। इसमें जो स्ट्रेचर है, वे खराब हो गए हैं। इसकी वजह से दिक्कतें हो रही हैं। इसकी जानकारी जिला कोऑर्डिनेटर को दे दी गई है।
एंबुलेंस में आए मरीजों के परिजनों ने बताया कि 102 व 108 नंबर पर कॉल करने के आधे घंटे इंतजार के बाद एंबुलेंस दरवाजे पर पहुंची। 13 एंबुलेंस जुगाड़ से चल रही हैं। कई बार मरीजों को लेकर आते समय रास्ते में खराब भी हो जाती हैं। इन एंबुलेंस में ऑक्सीजन और फर्स्ट एड बॉक्स में दवाओं का अभाव है। अगर गंभीर रोगी को लेकर आना हो तो भगवान ही उसके मालिक हैं। क्योंंकि जरूरत पर उसे एंबुलेंस में उपचार भी नहीं मिलेगा। ईएमटी शिवकुमार गौड़ ने बताया कि फर्स्ट एड बाॅक्स में जरूरत की अधिकांश दवाएं हैं। जो नहीं हैं, उसे रख लिया जाएगा। छोटा ऑक्सीजन सिलिंडर है।

बदली जाएंगी बीएस-3 की एंबुलेंस
71 एंबुलेंस में 13 बीएस-3 की हैं। इन्हें बदलने की प्रक्रिया चल रही है। सर्वाधिक मरीजों को लाने में यही खराब होते हैं। इस पर तैनात चालक और ईएमटी अक्सर परेशान रहते हैं।

एंबुलेंस खराब होने की जानकारी नहीं : कोऑर्डिनेटर
जिले में संचालित एंबुलेंस की मॉनिटरिंग के लिए जिला कोऑर्डिनेटर प्रशांत और राहिल को रखा गया है। दोनों लोगों के जिम्मे 35-35 एंबुलेंस की जिम्मेदारी है। दोनों लोगों से बात करनेे पर बताया कि एंबुलेंस तो ठीक हैं। खराबी की कोई जानकारी नहीं है। अगर ऐसी स्थिति है तो दिखवा लिया जाएगा।

केस-एक
-कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के अमवा बुजुर्ग गांव निवासी 45 वर्षीय संजय पांडेय का सिर आपसी विवाद में पट्टीदारों ने फोड़ दिया था। 11 बजे उनके बेटे ने 108 नंबर पर फोन किया। आधे घंटे बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची तो घायल अपने पिता को बोलेरो से लेकर कुबेरस्थान सीएचसी पर पहुंचे। वहां से रेफर होने के बाद एंबुलेंस से जिला अस्पताल आए।
केस-दो
-चखनीपुर छपरा गांव के महावीर की पत्नी मालती देवी की पड़ोसियों ने शुक्रवार की रात पिटाई कर दी। अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस को फोन किया। चार बार फोन किया तो 45 मिनट बाद एंबुलेंस पहुंची। इसके बाद वह जिला अस्पताल इलाज के लिए लाए। महावीर ने बताया कि मजबूरी थी, इंतजार करना। रात को कोई साधन नहीं मिल रहा था।

केस-तीन
-डिबनी बंजरवा गांव के निवासी 80 वर्षीय रमजान की सांस फूल रही थी। उनके बेटे आरिफ ने एंबुलेंस को फोन किया। करीब 40 मिनट बाद एंबुलेंस पहुंची और जिला अस्पताल पहुंचाई। स्ट्रेचर खराब होने के कारण उन्हें पैदल ही इमरजेंसी कक्ष तक पहुंचाया गया।
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केस-4
खराब हो गई एंबुलेंस, परिजनों ने दिया धक्का, मरीज की हो गई मौत
अभी तीन जून को पटहेरवा थाना क्षेत्र के बलुआ शमशेर शाही गांव के मोहन शर्मा के 17 वर्षीय पुत्र बबलू की तबीयत अत्यधिक खराब हाे गई थी। उसे सांस लेने में ज्यादा तकलीफ थी। परिजन उसे लेकर फाजिलनगर सीएचसी पहुंचे, जहां से डॉक्टर ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। फोन कर एंबुलेंस मंगाए और उससे जिला अस्पताल लेकर आ रहे थे। कुछ दूर आने पर एंबुलेंस खराब हो गई। चालू न होने पर लोगों ने एंबुलेंस को धक्का दिया, फिर भी एंबुलेंस चालू नहीं हुई। उसके बाद दूसरी एंबुलेंस के लिए फोन किया गया। एंबुलेंस भेजने के लिए बात हुई थी, लेकिन उसे आते-आते लगभग दो घंटे लग गए। एंबुलेंस के पहुंचने पर बबलू को उसमें शिफ्ट किया जाने लगा, तब तक उसकी मौत हो गई। मोहन शर्मा का कहना था कि यदि एंबुलेंस ठीक स्थिति में रही होती या दूसरी एंबुलेंस भी समय से पहुंच गई होती तो शायद उनके बेटे की मौत नहीं हुई होती।
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