कसया। ऐतिहासिक बौद्ध कालीन नदी हिरण्यवती के जीर्णोद्धार के लिए जनसहयोग की जरूरत है। जनसहयोग के बगैर नदी का जीर्णोद्धार नहीं किया जा सकता है। हिरण्यवती के अस्तित्व को बचाने के लिए ठोस और समग्र प्रयास किया जाना जरूरी है।
जीवन का आधार जल है और जल के स्रोत नदी, तालाब, कुएं हैं। उनके संरक्षण से ही जल के संकट से उबरा जा सकता है। विश्व की सारी सभ्यताएं नदियों के किनारे की विकसित हुईं हैं। ये बातें सोमवार को कुशीनगर स्थित रामाभार स्तूप के निकट हिरण्यवती नदी के जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण कार्य के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीएम शंभू कुमार ने कही।
उन्होंने कहा कि हिरण्यवती नदी विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी है। इस नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए प्रशासन के साथ जनसहयोग की भी जरूरत है। काम बहुत बड़ा और कठिन है। लेकिन लगातार प्रयास से सफलता हासिल की जा सकती है। डीएम ने कहा कि अगर हिरण्यवती नदी का जीर्णोद्धार हो जाता है तो इस काम की सराहना देश के साथ ही विदेश में भी होगी।
सीडीओ केएन सिंह ने कहा कि जल जीवन का आधार है। लगातार भूगर्भ जलस्तर का गिरना जीवन के लिए खतरे की घंटी है। हिरण्यवती नदी की खुदाई और सफाई का काम एक पुनीत कार्य है। पहले फेज में एनएच-28 बी पडरौना से लेकर देवरिया मार्ग तक लगभग तीन किलोमीटर कार्य कराया जाना है।
जिसमें आने वाला क्षेत्र नगर पंचायत, अनिरूद्धवा, झुंगवा, सबया, विशुनपुरा आदि गांवों का भी सहयोग लिया जाएगा। इस मौके पर भंते महेंद्र, तहसीलदार वंदना पांडेय, पीडी राजेंद्र प्रसाद, उपायुक्त श्रम रोजगार एमपी चौबे, बीडीओ प्रभाशंकर चौबे, इओ बब्बन यादव, कसाडा के आशीष द्विवेदी, भंते पी सोंक्रान, अरविंद पति त्रिपाठी मौजूद रहे।