पडरौना। शहर के निजी अस्पताल, क्लीनिक, नर्सिंग होम, पैथालॉजी व एक्स-रे स्टोर से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण को लेकर सीएमओ डॉ. सुरेश पटारिया ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने निजी अस्पताल के संचालकों सख्त हिदायत दी है। सीएमओ का कहना है कि अगर बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में लापरवाही पाई गई तो संबंधित अस्पताल का पंजीकरण निरस्त उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
शहरी क्षेत्र में 30 से अधिक निजी अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक, पैथालॉजी सेंटर और एक्स-रे सेंटर संचालित होते हैं। इन मेडिकल सेंटरों से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट मैटेरियल्स, खून, मल-मूत्र और घातक केमिकल्स से भीगे कॉटन-पट्टी से लेकर सिरिंज व दवाएं खुले में फेंकी जा रही थीं। कुछ ऐसे भी सेंटर मिले, जो कूड़े को जलाकर पर्यावरण को दूषित कर रहे थे। जबकि निजी अस्पतालों के पंजीकरण के समय ही बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट से किए गए करार के कागजात को भी शामिल करना होता है। बावजूद इसके अस्पतालों से निकलने वाले कूड़े को जिम्मेदार या तो खुले में फेंक देते थे या फिर उसे जला देते थे। सीएमओ डॉ. सुरेश पटारिया ने निजी अस्पताल के संचालकों को हिदायत दी है। उन्होंने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण का सर्टिफिकेट चेक किया जाएगा। अगर किसी के पास यह सर्टिफिकेट नहीं है तो अस्पताल का पंजीकरण निरस्त कर कार्रवाई की जाएगी। सीएमओ ने कहा कि किसी भी अस्पताल का पंजीकरण बिना बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण सर्टिफिकेट के नहीं किया जाएगा। जो अस्पताल पहले से पंजीकृत हैं, उन्हें भी बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण का प्रमाण पत्र दिखाना होगा।