एनएच 28 पर जेल्हिनिया चौराहा के पास रविवार देर रात घने कोहरे के बीच एक वाहन की ठोकर से टेंपो सवार चार बुजुर्गों की मौत हो गई। इनमें तीन महिलाएं हैं। इनके अलावा टेंपो सवार चार अन्य बुजुर्ग घायल हो गए, जिन्हें गंभीर हालत में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। ये सभी गोरखपुर के एक निजी अस्पताल से आंख का ऑपरेशन कराकर घर लौट रहे थे। पुलिस ने एक शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, जबकि तीन अन्य के घर वालों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया। हादसे के बाद से टेंपो चालक फरार है।
हाटा कोतवाली क्षेत्र के पैकौली गांव में दो दिन पहले गोरखपुर के एक निजी नेत्र अस्पताल ने कैंप लगाया था। इसमें आयुष्मान कार्ड धारकों की आंखों की जांच की गई। जांच के बाद मोतियाबिंद के जिन मरीजों को ऑपरेशन की जरूरत थी उन्हें रविवार को गोरखपुर स्थित अस्पताल पर बुलाया गया था। हाटा कोतवाली क्षेत्र के पिड़रा गांव की गुलाबी देवी (70), श्रीराम (65), मुनेसर (64), शंखापार माफी गांव की उषा देवी (55), सुमित्रा देवी (56), बासकली (70), पैकौली गांव की इंद्रावती देवी (70), सुशीला देवी (55) रविवार सुबह एक ही टैंपो से ऑपरेशन कराने के लिए घर से निकले। टेंपो अनिरुद्ध चौहान चला रहा था।
ऑपरेशन के बाद डॉक्टर ने देर शाम सभी को छुट्टी दे दी। गोरखपुर में रहने का ठौर नहीं होने के कारण सभी टेंपो से घर के लिए चल दिए। घना कोहरा होने के कारण चालक धीरे-धीरे रुकते हुए चल रहा था। रात करीब एक बजे टेंपो हाटा कोतवाली के जोल्हिनिया चौराहा के पास पहुंचा। हाइवे के कट से पिड़रा जाने के लिए टैंपो मुड़ रहा था, तभी कुशीनगर की तरफ से आए एक वाहन ने उसमें टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि पास के गांव तक आवाज लोगों को सुनाई दी। टैंपो सवारों की चीख पुकार सुनकर आसपास के लोग पहुंच गए और पुलिस को सूचना दी।
मौके पर पहुंची पुलिस ने एंबुलेंस से घायलों को सुकरौली पीएचसी पर पहुुंचाया, जहां डॉक्टर ने गुलाबी देवी, उषा देवी, श्रीराम और इंद्रावती देवी को मृत घोषित कर दिया। जबकि घायलों सुमित्रा देवी, मुनेसर, सुशीला देवी और बासकली की हालत गंभीर देख गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। सोमवार सुबह पुलिस शवों का पोस्टमार्टम कराने की तैयारी कर थी, इस दौरान गुलाबी देवी के परिजनों को छोड़ बाकी तीन शव बिना पोस्टमार्टम कराए परिजन लेकर चले गए और शव का दाह संस्कार कर दिए।