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Kushinagar News: आंखों की रोशनी लेकर लौट रहे चार लोगों की घर पहुंचने से पहले बंद हो गईं आंखें

Tue, 06 Feb 2024 03:50 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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सुकरौली बाजार। बढ़ती उम्र में कमजोर हुई आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराकर घर लौट रहे चार बुजुर्गों की आंखें हाईवे पर हुए हादसे में हमेशा के लिए बंद हो गईं। गंभीर रूप से घायल चार बुजुर्गों का इलाज गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। हादसे की खबर मिलते ही घर वालों में चीख-पुकार मच गई। हाटा कोतवाली में परिजनों के साथ गांव वालों का जमघट सोमवार को लग गई। घटना के बाद गांव में मातम छा गया है।
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रविवार को घर से आंखों का ऑपरेशन कराने के लिए निकले बुजुर्गों ने कभी नहीं सोचा था कि उनकी जिंदगी का यह आखिरी सफर होगा। इन महिलाओं की आंखों में मोतियाबिंद तो ज्यादे दिनों से था। लेकिन आर्थिक तंगी के कारण ऑपरेशन घर वाले नहीं करा पा रहे थे। गोरखपुर के एक आई अस्पताल की ओर से लगे कैंप में निशुल्क मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए आठ बुजुर्गों को बुलाया गया था। ऑपरेशन के दौरान अस्पताल में विलंब हो गया। गोरखपुर में रहने की व्यवस्था नहीं होने और टेंपो चालक की जल्दी के कारण सभी लोग रात करीब 8 बजे गोरखपुर से चल दिए। कोहरा होने के कारण रास्ते में देर हो गई। जोल्हिनिया चौराहा से गांव वाली सड़क पर जाने के लिए हाइवे का कट पार करते समय टेंपो दुर्घटना का शिकार हो गया। इसमें गुलाबी देवी, उषा देवी, श्रीराम और इंद्रावती देवी ने दम तोड़ दिया, जबकि चार बुजुर्ग घायल हो गए। शंखापार के टेंपो चालक अनिरुद्ध रात से ही लापता है। इसके परिजन भी घर पर मौजूद नहीं हैं। इस घटना के बाद गांव में मातम छा गया है। मृतक के परिजन आर्थिक रूप से कमजोर हैं। मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। हादसे के बाद एसडीएम राजेश कुमार वर्मा मृतकों के परिजनों से मिलकर ढाढ़स बंधाया। शासकीय मदद दिलाने का आश्वासन दिया।

आयुष्मान योजना के तहत मोतियाबिंद का हुआ था ऑपरेशन
आर्थिक तंगी से जूझ रहे बुजुर्गों के पास आयुष्मान कार्ड था। इसी योजना के तहत गोरखपुर के निजी अस्पताल में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने गए थे। घर वालों की माने तो आयुष्मान कार्ड को लेकर मेडिकल कॉलेज के अलावा कई सरकारी अस्पतालों पर मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए बुजुर्ग गए थे, लेकिन किसी भी अस्पताल में ऑपरेशन नहीं हो सका था।
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पति का पहले छूट गया था साथ, बेटियों की शादी के बाद खुद छोड़ी दुनिया
-मृतक इंद्रावती देवी के पति की दो साल पहले मौत हो चुकी थी। उसकी छह बेटियां हैं, छोटी बेटी की शादी दिसंबर 2023 में कर दी थी। इंद्रावती की मौत के बाद रिश्तेदार दरवाजे पर पहुंच गए और बेटिया दहाड़े मारकर रो रही थी। इंद्रावती का अंतिम संस्कार पोते ने किया। पिड़रा की रहने वाली गुलाबी देवी का एक बेटा है, जो मजदूरी कर परिवार चलाता है। मृतक और घायलों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण गांव वालों ने दाह संस्कार में सहयोग कया। गांव वालों ने प्रशासन से सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता देने की मांग की है।
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देवदूत बनकर पहुंचे गांव वाले
-प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो हादसे के बाद चीखने की आवाज सुनकर लोग पहुंचे। कोहरा इतना था कि कुछ समझ में नहीं आ रहा था। करीब आधे घंटे बाद मौके पर पुलिस पहुंची। इसके बाद घायलों को एंबुलेंस बुलाकर अस्पताल भेजा गया। जब लोग पहुंचते तो मौके पर टेंपो चालक नहीं था। टेंपो में सभी लोग दबे हुए थे, काफी प्रयास के बाद सभी को बाहर निकाला गया।
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