सुकरौली (कुशीनगर)। कभी बैलों की चाल से घूमते कोल्हुओं और उबलते रस की भाप से महकने वाला सुकरौली क्षेत्र अब पैकेटबंद खुरमा और तिलगुड़ के लिए जाना जा रहा है। समय के साथ, जिले में कभी 500 से अधिक कोल्हुओं की पहचान सिमट गई लेकिन गुड़ की मिठास ने नया रूप धारण कर लिया है। आज यही मिठास छोटे पैकेटों में बंद होकर बिहार, नेपाल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के बाजारों तक पहुंच रही है। क्रशर और मशीनों से तैयार खुरमा और तिलगुड़ के पैकेटों ने इस पारंपरिक कारोबार को एक नई दिशा दी है।
गोरखपुर की ओर से सुकरौली पहुंचने पर हाईवे के शुरुआती हिस्से में आज भी 12 से अधिक बड़ी दुकानें गुड़ और उससे बने उत्पादों से सजी दिखाई देती हैं। पहले जहां ग्राहक कई किलो की गुड़ की डलियां खरीदकर ले जाते थे, वहीं अब एक पाव, आधा किलो और एक किलो के आकर्षक पैकेटों ने उनकी जगह ले ली है। इस पैकेजिंग ने उत्पादों को दूर-दराज के बाजारों तक पहुंचाना आसान बना दिया है।
उत्पाद बढ़े, बाजार का दायरा भी
बाहर से देखने पर भले ही पुराने दौर के कोल्हुओं की रौनक कम हो गई हो, लेकिन दुकानों पर सजे गुड़ के अलग-अलग उत्पाद बताते हैं कि कारोबार ने रास्ता बदला है, खत्म नहीं हुआ। कुछ उत्पाद स्थानीय स्तर पर तैयार किए जा रहे हैं, जबकि कई तैयार उत्पादों की पैकेजिंग कर उन्हें बाजार में उतारा जा रहा है। व्यापारी दिनेश प्रजापति बताते हैं कि पहले आसपास के छोटे कोल्हुओं से बड़ी मात्रा में गुड़ दुकानों पर आता था। अब कोल्हुओं की संख्या काफी कम हो गई है, लेकिन दुकानों और बाजार का दायरा बढ़ा है। केवल देसी गुड़ पर निर्भर रहने के बजाय खुरमा, तिलगुड़ और दूसरे उत्पाद रखने से अलग-अलग पसंद के ग्राहक मिल जाते हैं।
व्यापारी चंदन कुमार के अनुसार, पहले हाईवे से गुजरने वाले लोग मुख्य रूप से देसी गुड़ खरीदते थे। अब छोटे पैकेटों के साथ तिलगुड़ और खुरमा जैसे उत्पाद भी ग्राहकों को पसंद आ रहे हैं। यहां के उत्पाद शहरों और दूर-दराज के बाजारों तक पहुंच रहे हैं। इससे पारंपरिक कारोबार का स्वरूप जरूर बदला है, लेकिन गुड़ की मिठास और उसकी बाजार में पहचान अब भी कायम है।
सुकरौली के अलावा सिंधुआं, खिरकियां, जटहा बाजार, बतरौली, पकड़रियार, निबुआ नौरंगिया, शिवपुर, मिश्ररौली समेत जिले के कई इलाकों में लोगों ने गुड़ के नए पैकेजिंग कारोबार शुरू कर दिया है। इन इलाकों में गुड़ से बने उत्पादों के पैकेट तैयार होते हैं, जिन्हें यहां से नेपाल-बिहार समेत प्रदेश के कई जिलों के कारोबारी आकर ले जाते हैं। यहां तक कि राम मंदिर के उद्घाटन के अवसर पर भी कुशीनगर का गुड़ भेजा गया था। संवाद
नए अवसर भी मिल रहे
शिवपुर के कारोबारी अनिरुद्ध जायसवाल कहते हैं कि तकनीक ने कुशीनगर के पारंपरिक गुड़ कारोबार को भले ही बदल दिया हो लेकिन इसने नए अवसर भी पैदा किए हैं। छोटे पैकेटों में पैकेजिंग और नए उत्पादों जैसे खुरमा और तिलगुड़ के विकास ने इस क्षेत्र की मिठास को न केवल बरकरार रखा है, बल्कि इसे नए बाजारों तक पहुंचाने में भी मदद की है। यह परिवर्तन दर्शाता है कि कैसे पारंपरिक उद्योग भी बदलते समय के साथ अनुकूलित होकर अपनी प्रासंगिकता बनाए रख सकते हैं।
सुकरौली में गुड़ की कई वैरायटी में बने उत्पाद से सजी दुकान।संवाद