पडरौना। शहर के बीच से होकर गुजरे मुख्य पश्चिमी गंडक पर बने पुल के पास रोजाना जाम से परेशान लोगों के लिए अच्छी खबर है। इस पुल के पास पूरब की तरफ सात मीटर का नया पुल बनेगा। इस निर्माण कार्य पर करीब 16 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
इसके लिए एचएच की तरफ से प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया गया है। एक से दो माह में पुल निर्माण की स्वीकृति भी मिल जाएगी। दीपावली के बाद नए पुल का निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। इस पुल का निर्माण होने के बाद वहां मौजूद पुराने पुल को भी ध्वस्त कर नए सिरे से निर्माण कार्य कराया जाएगा। गंडक नहर पर पुल निर्माण होने के बाद वहां लगने वाले हर समय से जाम से लोगों को मुक्ति मिल जाएगी।
सुभाष चौक से जिला मुख्यालय की तरफ से जाने वाली सड़क शहर की सबसे व्यस्त मार्ग है। गंडक नहर पर बने पुल के दोनों तरफ सड़क तो चौड़ी कर दी गई है, लेकिन पुल अभी संकरा है। इस रास्ते जिला मुख्यालय के अलावा कसया, गोरखपुर, देवरिया, कुबेरस्थान, तुर्कपट्टी के लोग आते-जाते हैं। लोगों को इस मार्ग पर स्थित गंडक नहर पर बने पुल को पार करना पड़ता है। इस पुल के दोनों तरफ सड़क चौड़ा कर एनएच-28बी बनाया गया है। इसके अलावा नहर की पटरी से होकर नेपाल को जोड़ने के लिए झुलनीपुर जाने के लिए बाईपास सड़क बनी है। इस मार्ग पर भी हर दिन वाहनों की लंबी लाइन लगी रहती है। यहां बनी सड़क की अपेक्षा पुल संकरा होने के कारण रुक-रुक कर पूरे दिन जाम लगता रहता है। सप्ताह में दो से तीन ऐसा होता कि इसकी दोनों तरफ से करीब एक किलोमीटर तक वाहनों की लंबी लाइन लाइन लग जाती है।
उससे निकलने में लोगों को घंटे भर का समय लग जाता है। उसे खत्म कराने में पुलिस के भी पसीने छूट जाते हैं। लोगों को इस समस्या से शीघ्र ही निजात मिलने वाली है। राज्यसभा सदस्य आरपीएन सिंह की पहल पर एनएचएआई के अधिकारियों ने यहां नए पुल निर्माण के लिए डीपीआर बनाकर शासन को भेज दिया गया है।
यातायात पुलिस रोज हटवाती है जाम
मुख्य पश्चिमी गंडक नहर की पटरी पर वैसे तो हर दिन रूक-रूक कर जाम लगता हैं, लेकिन सामान्य दिनों में तो सुबह दस बजे और दोपहर दो बजे से शाम चार बजे तक जाम अधिक लगता है। यहां सोमवार और अवकाश के बाद सरकारी खुलने पर तो जाम की समस्या और बढ़ जाती है। हालत यह होती है कि जाम लगने पर पुल के दोनों तरफ एक से डेढ़ किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार लगा जाती है। पुल के पास लगे इस जाम से लोगों को निजात दिलाने के लिए यातायात पुलिस के अलावा पांच से छह होमगार्ड के जवान तैनात रहते हैं। इसके बाद भी जाम में फंसे लोगों को निकलने में 20 से 25 मिनट लग जाता है।