निर्माणाधीन जिला कारागार के पास करीब 15 किलोमीटर लंबे सरकारी नाले पर हुए कब्जे को लेकर उठे विवा
मंसाछापर। निर्माणाधीन जिला कारागार के सामने करीब 15 किलोमीटर लंबे सरकारी नाले पर कब्जे के विवाद के समाधान की पहल हुई है। दो दर्जन से अधिक गांवों के बाढ़ व बारिश के पानी की निकासी के लिए इस नाले को खाली कराने के लिए अधिकारियों की मौजूदगी में बैठक हुई। निर्णय लिया गया कि प्रस्तावित जेल के सामने जितने हिस्से में नाले पर कब्जा हुआ है, वहां लगभग 12 फीट चौड़ी आरसीसी ड्रेन बनाई जाएगी। नाला निर्माण के लिए सबसे पहले रास्ते में आने वाले पेड़ों को हटाया जाएगा। इसके बाद ही जेल की दूसरी बाउंड्री वाल का निर्माण शुरू किया जाएगा।
शिकायतकर्ता ग्राम प्रधान सिरसिया दीक्षित सुनील उर्फ धनंजय दीक्षित की तरफ से पिछले महीने दिए गए शिकायत पत्र के क्रम में जिला कारागार अधीक्षक देवरिया अभिषेक रंजन, तहसीलदार पडरौना अभिषेक मिश्रा, नायब तहसीलदार तथा हल्का लेखपाल संदीप सिंह बृहस्पतिवार को मौके पर पहुंचे और किसानों व ग्रामीणों से वार्ता की। बैठक में यह भी तय हुआ कि एक दिन पहले किसानों, जेल प्रशासन और निर्माण कर रही कंपनी की मौजूदगी में नाले के निर्माण स्थल का संयुक्त रूप से चयन कराया जाएगा, ताकि भविष्य में कोई विवाद न रहे।
ग्रामीणों ने बताया कि कंपनी ने नाले को बड़ी नहर के बिल्कुल सटाकर बना दिया है। इससे सड़क चौड़ीकरण और अन्य कार्यों के लिए पर्याप्त जगह नहीं बचती। अब तय हुआ है कि बड़ी नहर और सड़क से पर्याप्त दूरी छोड़ते हुए जेल की दूसरी बाउंड्री वाल से दो से तीन फीट की दूरी पर पक्का नाला बनाया जाएगा, जिससे जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
इस दौरान सुमंत दुबे, छोटेलाल सिंह, योगेंद्र सिंह, कन्हैया सिंह, ओंकारेश्वर दीक्षित, मन्नू सिंह, साबिर प्रधान, वेद प्रकाश दीक्षित, भरत गुप्ता सहित क्षेत्र के कई किसान व ग्रामीण उपस्थित रहे।