पडरौना। भूख, बच्चों की पढ़ाई और परिवार की दवाई की चिंता से ग्रसित पडरौना चीनी मिल के मजदूरों ने बृहस्पतिवार को मिल के अधिकारियों को घेरकर अपनी पीड़ा कही तो मौके पर प्रशासनिक और पुुलिस के जवान पहुंच गए। मजदूरों की समस्या से भावुक हुए एसडीएम ने एक दिन का समय मांगा है। मजदूरों का कहना है कि वे अपने हक के लिए किसी हद तक जाने को तैयार हैं।
पडरौना की चीनी मिल दो वर्षों से बंद चल रही है। वर्तमान में भी चीनी मिल में 118 मजदूर कार्यरत हैं। मजदूरों के अनुसार इन्हें नवंबर 2012 से वेतन नहीं मिल रहा है। अब तक किसी तरह से चला, लेकिन अब फांकाकसी शुरू हो गई है। एक मजदूर की मौत रुपये के अभाव में दवा नहीं होने से हो गई। दूसरे मजदूर मेडिकल कॉलेज में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। चीनी मिल के मजदूर बताते हैं कि एक मजदूर की पत्नी पडरौना के एक नीजी अस्पताल में जिंदगी के लिए जूझ रही है। बृहस्पतिवार को वे सहयोग के लिए आए थे, लेकिन खाली हाथ मजदूर उनकी मदद करने में लाचार रहे। बेवस मजदूरों की पीड़ा आज सतह पर आ गई और वे किसी भी हद तक जाने के लिए उतारू हो गए। मजदूरों का कहना है कि दशहरे और दिवाली की तरह होली का त्योहार पर भी हाथ खाली हैं। बच्चों की पढ़ाई बंद होने के कगार पर है तो परिवार की दवाई भी नहीं हो पा रही है। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे एसडीएम सदर सचिन कुमार सिंह ने एक दिन की मोहलत मंागी है। शुक्रवार दोपहर के बाद मजदूर फिर अंादोलन की रणनीति बनाएंगे।