पडरौना। बृहस्पतिवार की शाम को सुहेल की हत्या की खबर जैसे ही मुगलपुरा छावनी पहुुंची, लोगों की भीड़ सुहेल के दरवाजे पर जुटने लगी। हर कोई यह जानना चाहता था कि तुर्कपट्टी क्षेत्र में मिला शव सुहेल का है या किसी और का? लेकिन परिवारीजनों ने घर की औरतों को इस बात की भनक नहीं लगने दी। जो भी पहुंचता था, उसे दरवाजे से यह कहकर वापस कर दिया जाता था कि अब तक औरतों को बताया नहीं गया है। फिर भी लोग दरवाजे से हटते नहीं थे।
सुहेल की मां के मोबाइल पर फिरौती की रकम मांगे जाने के बाद से ही घर के लोग सदमे में थे। उन्हें इस बात की लगी रहती थी कि अपहरणकर्ता उसे न जाने किस हाल में रखे होंगे। फिरौती मांगने वाले ने बुधवार को रुपये जुटाकर रखने को भी कहा था। लेकिन उसके बाद से कोई फोन नहीं आया। बृहस्पतिवार की शाम को जब तुर्कपट्टी क्षेत्र में शव मिलने की खबर आई तो परिवार के लोगों की घबराहट बढ़ गई। परिवार के लोग और उनके सगे संबंधी उसी समय मौके पर जाने के लिए चल दिए। आखिरकार वही हुआ, जिसका उन्हें डर था। शव सुहेल का ही था। शव मिलने की बात मालूम होने पर लोगों की भीड़ उनके दरवाजे पर जुटने लगी।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठने लगे सवाल
पडरौना। सोमवार को अगवा हुए सुहेल की तलाश में कोतवाली और क्राइम बंाच की पुलिस लगी थी। पुलिस को जब तक कोई सुराग मिलता, सुहेल का शव मिल गया। इस घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
नगर के मुगलपुरा छावनी निवासी छात्र सुहेल सोमवार को अपने परिवार में यह कह कर गए थे कि वह दावत खाने जा रहे हैं। उसी दिन रात में 10 लाख की फिरौती के लिए फोन आया। उसके बाद सुहेल के परिवार को उसके अगवा होने की खबर लगी। सुहेल की मां ने इसकी सूचना कोतवाली पडरौना की पुलिस को दी। पुलिस ने मुकदमा लिखकर छानबीन शुरू कर दी। इस अपहरण का खुलासा करने के लिए कोतवाली पुलिस के साथ क्राइम बंाच की पुलिस को भी लगाया गया था। तीन दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ इस घटना का कोई सुराग नहीं मिला था। बृहस्पतिवार को जब कुबेरस्थान थानाक्षेत्र की सीमा से सटे तुर्क पट्टी थाना क्षेत्र में एक शव मिलने का पता चला तो छावनी में इस बात के कयास लगाए जाने लगे कि शव कहीं स़ुहेल का तो नहीं? कुछ ही देर बाद सुहेल के परिवार वालों ने इस बात की पुष्टि कर दी कि मिला शव सुहेल का ही है। उसके बाद छावनी मुहल्ले में इस बात की चर्चा होने लगी कि पुलिस को कुछ नहीं मिला लेकिन परिवार वालों को सुहेल का शव जरूर मिल गया। सुहेल के दरवाजे पर पहुंचे लोग पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई तरह के प्रशभन चिह्न खड़े कर रहे थे। लोगों का कहना था कि पुलिस उस नंबर का सहारा लेकर अपराधियों तक पहुंच सकती थी, जिस नंबर से सुहेल के घर पर फिरौती केे लिए फोन आया था।