रामकोला। त्रिवेणी चीनी मिल के गेट पर गन्ना किसानों की समस्याओं के निस्तारण को लेकर सोमवार को हियुवा ने प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह की अगुवाई में धरना-प्रदर्शन शुरू किया। धरनास्थल पर पहुंचे एसडीएम हाटा से वार्ता विफल होने के बाद आंदोलनकारी चीनी मिल उपाध्यक्ष के बंगले पर कब्जा करने के लिए कूच किए तो माहौल गरम हो गया। हियुवा कार्यकर्ता किसी भी कीमत पर गन्ना मूल्य भुगतान करने की मांग पर अड़े थे जबकि चीनी मिल के अधिकारी एक सप्ताह में भुगतान शुरू करने की बात कह रहे थे। पूरे दिन पुलिस प्रशासन और प्रदर्शन करने वालों के बीच काफी गरम माहौल रहा। देर शाम को एसडीएम हाटा एसकेेे शर्मा पहुंचे । उन्होंने पांच किसानों के 1,06,427 रुपये के दो बैंकों में भुगतान का एडवाइज दिखाया। साथ ही उन्होंने एक हफ्ते में नया और पुराना भुगतान कराने के लिए लिखित आश्वासन भी दिया। इसके बाद धरना खत्म हुआ।
दिन के बारह बजे शुरू हुए धरने में हियुवा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा कि चीनी मिलें मनमानी कर रही हैं। प्रदेश सरकार इनकी हां में हां मिला रही हैं। गन्ने की लागत बढ़ने के बाद भी गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया गया। किसान उस पर भी गन्ना चीनी मिलों को दे रहा है। पुराना बकाया चीनी मिलें देने का नाम नहीं ले रही हैं। इस चीनी मिल के चालू हुए 24 दिन हो गए। इसके बाद भी नए पेराई सत्र का भुगतान शुरू नहीं किया गया। सरकार और प्रशासन चीनी मिलों के आगे पंगु बन गया है। चीनी मिलें लगातार गन्ना खरीद एक्ट का उल्लंघन कर रही हैं लेकिन प्रशासन कोई भी कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक गन्ना मूल्य भुगतान शुरू नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन चलता रहेगा। उन्होंने चीनी मिल पर घटतौली करने, सप्लाई टिकट में धांधली करने का आरोप लगाते हुए मांग की कि आठ घंटे से अधिक समय तक केन यार्ड में रुकने वाले गाड़ीवानों और ट्रैक्टर चालकों को चीनी मिल के कैंटीन में सस्ते दर पर खाद्य पदार्थों को उपलब्ध कराया जाए। हियुवा और विहिम के जिला प्रभारी अजय गोविंद राव शिशु ने कहा कि जिले की कोई भी चीनी मिल पुराना बकाया मूल्य नहीं दे रही है। प्रशासन भी मौन बना हुआ है। चीनी मिलों के मनमाने पर प्रशासन भी अंकुश नहीं लगा पा रहा है। इससे चीनी मिलों के प्रबंध तंत्र के लोग किसानों का उत्पीड़न कर रहे हैं। जिस प्रजाति के गन्ने को चीनी मिल ने ही किसानों को दिया, अब उसी प्रजाति के गन्ने को खरीदने में चीनी मिल अधिकारी आनाकानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसकी जांच के लिए गन्ना वैैैैैैैैैैैैैैैैज्ञानिकों और किसानों की टीम गठित की जानी चाहिए। धरने को हियुवा के राजेश्वर सिंह, संजय सिंह मुन्ना, चंद्रप्रकाश चमन, राजन जायसवाल, फूलबदन कुशवाहा, आशुतोष गोविंद राव गोलू, शेषमणि गौंड, दिग्विजय किशोर शाही, दीपक शर्मा सहित कई लोगों ने संबोधित किया। अपराह्न चार बजे धरनास्थल पर पहुंचे एसडीएम हाटा एसके शर्मा, सीओ खड्डा विनोद कुमार यादव को हियुवा कार्यकर्ताओं ने मांगों का ज्ञापन देकर कहा कि किसानों का भुगतान तत्काल शुरू करवाया जाए। इसके बाद अधिकारियों ने चीनी मिल प्रबंध तंत्र के लोगों से बात की। वार्ता के बाद एसडीएम ने जैसे ही कहा कि चीनी मिल प्रबंध तंत्र के लोग एक सप्ताह में भुगतान शुरू करने की बात कह रहे हैं, हियुवा कार्यकर्ता उग्र हो गए। चीनी मिल का मेन गेट खोलवाकर अंदर घुस गए और नारेबाजी करने लगे। आंदोलनकारियों के सामने प्रशासन बौना साबित हो रहा था। आंदोलकारियों के तेवर देख प्रशासन बैकफुट पर आ गया। चीनी मिल के अंदर नारेबाजी करने के बाद आंदोलनकारी पुन: धरना स्थल पर वापस आ गए। आधे घंटे तक सभा करने के बाद एक बार फिर माहौल गरम हो गया। इस बार आंदोलनकारी चीनी मिल परिसर में स्थित उपाध्यक्ष के बंगले को घेरने के लिए कूच कर दिए। चारों तरफ अफ रातफरी मच गई। पुलिस और प्रशासन के लोग चीनी मिल के अंदर से ही बंगले के गेट तक पहुंच गए। प्रदर्शनकारी बंगले के गेट तक पहुंचे उसके पहले गेट में ताला बंद किया जा चुका था। बंद गेट के बाहर ही प्रदर्शनकारी नारेबाजी करने लगे। मौके पर पहुंचे एसडीएम के काफी समझाने के बाद प्रदर्शनकारी धरना स्थल तक वापस आए। इसके बाद फिर वार्ता का दौर शुरू हुआ। प्रदर्शनकारी अपनी मंागों पर अड़े रहे उनका कहना था कि एक भी किसान का भुगतान किया जाए लेकिन प्रशासन इस बात पर भी चीनी मिल प्रबंध तंत्र को राजी नहीं कर सका। शाम को एसडीएम हाटा के आश्वासन पर धरना समाप्त हुआ। इस अवसर पर पारसनाथ कुशवाहा, चंद्रभूषण तिवारी, अरविंद दीक्षित, सुनील सिंह, राघवेंद्र मल्ल सहित बड़ी संख्या में किसान और कार्यकर्ता मौजूद रहे।