पडरौना। नगर के सबसे बड़े बाजार तुलसी मार्केट का भवन इस कदर जर्जर हो गया है कि यहां के अधिकतर दुकानदार अपनी दुकानें बंद कर चुके हैं। जो कारोबार कर भी रहे हैं, उन पर भी खतरा मंडराता रहता है। इस मार्केट में अपने कार्याें से आने वाले लोगों को भी जान का खतरा बना रहता है। तीन दशक पूर्व बने इस मार्केट के दुकानदारों का कहना है कि कभी इसकी सफाई नहीं होती है। बिजली, पानी की व्यवस्था भी नहीं है। 110 दुकानों के इस मार्केट में एक शौचालय तक नहीं है। जबकि दुकानदारों का कहना है कि वे किराया प्रतिमाह देते हैं। कटरे की कई दुकानों के शटर तक गायब हो गए हैं।
रामकोला रोड पर तुलसी मार्केट के नाम से वर्ष 1980-81 में कटरा बनवाया गया था। 110 दुकानाें वाले इस कटरे में वर्तमान में केवल 30 दुकानदार ही कारोबार कर रहे हैं। स्वयं की बिजली व्यवस्था से कारोबार करने वाले दुकानदार कटरे की जर्जर भवन से इतने भयभीत हैं कि ग्राहक को दुकान की छत के नीचे नहीं आने देते हैं। जर्जर कमरों की छत से सरिया के नीचे की आधी ईंट टूटकर गिर रही है। दीवारें क्रैक हो गईं हैं। फर्श के नाम पर कुछ भी नहीं है। दीवारों के प्लास्टर फटकर गिर रहे हैं। दुकानदार कहते हैं कि छत र्की इंट कब टूटकर गिर जाए, इसका कोई भरोसा नहीं है। अपना रोजगार चलाने के लिए दुकानदार इस कटरे के भवन में जान हथेली पर लेकर दुकानदारी कर रहे हैं। कटरे के छत पर घास उग गई है। छत बीच में नीचे की तरफ झुक गया है। इसके कारण बरसात का पानी इसी छत पर जमा होता है। दुकानदार बताते हैं कि एक दिन बरसात होने के बाद बरसात का पानी तीन दिनों तक टपकता है। पूरे मार्केट में एक भी स्ट्रीट लाइट नहीं है। शाम होने के बाद कटरा भूतखाना नजर आने लगता है। इस कारण शाम ढलते ही दुकानदार अपनी दुकानें बंद कर देते हैं। दुकानदार कहते हैं कि बगल के मैरिज हॉल में जिस दिन कोई शादी या अन्य आयोजन रहता है, तो उस दिन दुकानदारी बहुत पहले बंद करनी पड़ती है। क्याेंकि आतिशबाजी के कारण मकान की छत कांपती है और छत के ईंट जरूर टूटकर गिरते हैं। शाकिर मिस्त्री, सुखारी मिस्त्री, अरुण बगाड़िया, नाजिम आदि दुकानदारों ने बताया कि कई बार भवन के छत से टूर्टी इंटें उनके अगल -बगल गिरीं। संयोग अच्छा रहा कि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ। दुकानदाराें का कहना है वे तो हादसे के साये में रोजगार कर ही रहे हैं, ग्राहक को कोई जोखिम नहीं उठाने देते, इसी वजह से ग्राहक को हम लोग बाहर ही रखते हैं। जबकि ऐसी ही परिस्थितियों से तंग आकर नुरूल, सतीश, डॉ. ऐनुल्लाह, विभूती शर्मा सहित कई लोग अपनी दुकानें बंद कर चुके हैं।
जिविका के लिए हादसे के साए में करते हैं दुकानदारी
पडरौना। रामकोला रोड स्थित तुलसी कटरे की जर्जर बिल्डिंग में दुकानदार हादसे के साए में रोजगार करते हैं। स्वयं को असुरक्षित रखकर रोजगार करने वाले दुकानदार अपने ग्राहक को सुरक्षित रखने के लिए दुकान के छत के नीचे तक नहीं आने देते हैं। तीन दशक पूर्व बने इस कटरे की स्थिति काफी दयनीय है। इस कटरे में शौचालय और पानी तक की व्यवस्था नहीं है।
कटरे में फ्रीज और एसी के रिपेयर करने का कार्य करने वाले दुकानदार अब्बू हुरैरा बताते हैं कि सुबह दुकान खोलने के बाद जब तक दुकान बंद नहीं कर लेते तब तक सांसे टंगीं रहती हैं। इनका कहना है कि फटी दीवारों पर टपकने वाली छत से कर्ब इंट गिर जाए इसका कोई ठिकाना नहीं है। यह तो दुकानदारों का सौभाग्य है कि बार-बार्र इंट गिरती है लेकिन उससे कोई हताहत नहीं होता। इसी मार्केट में बैट्री की रिपेयरिंग करने वाले फक्रेआलम का कहना है कि वर्षों पूर्व निर्मित इस कटरे की आज तक मरम्मत नहीं कराई गई। पूरा भवन ही जर्जर हो गया है। एक दिन बरसात होती है तो तीन दिनों तक पानी टपकता है। इनके दुकान में कई बार छत से ईंट गिरी, जिससे सामान का नुकसान तो हुआ लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। इसी कटरे में ट्रैक्टर का गैराज चलाने वाले छोटे मिस्त्री का कहना है कि जब बगल के मैरिज हाल में किसी आयोजन में आतिशबाजी होती है तो हम दुकान बंद कर देते हैं। जर्जर भवन की छत में लगी सरिया के नीचे की आधी ईंट कब गिर जाए इसका कोई ठिकाना नहीं है। पूरे दिन हादसे की आशंका के बीच जीविका का बंदोबस्त किया जाता है। कटरे में सेल्फ, डायनामो और आरमेचर का कार्य करने वाले लड्डन बताते हैं कि पूरा कटरा भूतखाना बना हुआ है। साफ-सफाई कभी होती नहीं है। बिजली की व्यवस्था भी नहीं है। पूरा दिन भय के साये में गुजरता है। रोटी की व्यवस्था करने के लिए जान हथेली पर लेकर कार्य करना दिनचर्या बन चुकी है।