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मानदेय के लिए भूख हड़ताल शुरू

Sun, 22 Dec 2013 05:43 AM IST
Kushinagar
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पडरौना। डॉयट प्राचार्य पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए जांच की मांग करते हुए प्रेरकों के धरने के साथ भूख हड़ताल भी शुरू कर दी है। प्रेरकाें का आरोप है कि रुपये नहीं दिए जाने के कारण नवीनीकरण नहीं किया जा रहा है और नई नियुक्तियाें के लिए ज्ञापन जारी कर दिया गया है।
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कलेक्ट्रेट के सामने ग्राउंड में धरना और भूख हड़ताल कर रहे प्रेरकों का आरोप है कि डॉयट के प्राचार्य शासनादेश के विरुद्ध जाकर साक्षर भारत मिशन के धन का दुरुपयोग किया गया है।
धरनीपट्टी गांव के प्रेरक दिलशाद आलम का कहना है कि डॉयट के प्राचार्य ही जिला लोक शिक्षा समिति के सचिव हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में प्रेरकों का उत्पीड़न किया है। मानदेय मांगने वाले प्रेरकों की संविदा समाप्त कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना रुपये लिए किसी भी प्रेरक का नवीनीकरण नहीं किया गया है। तमकुही के प्रेरक रामनरेश प्रसाद का कहना था कि 1999 से वह प्रेरक हैं। पहले तो कुछ मिलता भी नहीं था। तब से हम कार्य कर रहे थे। जब कुछ मिलने का समय आया तो ऐसे डायट प्राचार्य से पाला पड़ा कि उन्हें निष्कासित तक की नौबत आ गई। रुपये तो मिले नहीं सम्मान भी गया। कसया की प्रेरक सरवत जहां का कहना था कि वह भी साक्षर भारत मिशन में 1999 से कार्य कर रहीं हैं। बिना रुपये का कार्य करते हुए उन्हें सुकून था। अब जब इस मिशन में रुपये मिलने का समय आया तो उनका हक भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। उन्होंने भी प्राचार्य पर आरोप लगाया है कि इस योजना के धन का बंदरवांट कर लिया, जिसके कारण प्रेरकों को मानदेय तक नहीं मिल पा रहा है।
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रतनवां की प्रेरक फूलपती का कहना है कि वह इस योजना में 2006 से कार्य कर रही हैं। जब रुपये नहीं मिलता था, तब ही ठीक था। गांव के लोगों को पढ़ाने में काफी इज्जत मिलती थी। लेकिन जबसे इस योजना में धन का प्रावधान हो गया, तब से इस योजना पर अधिकारियों की ऐसी कुदृष्टि लगी कि योजना को ही चौपट करके रख दिया। योजना के प्रचार प्रसार का धन अधिकारियों ने अपने डीजल पेट्रोल में खर्च कर दिया। अब मानदेय के लिए भूख हड़ताल करनी पड़ रही है।
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