पडरौना। नवीनीकरण से महरूम किए गए प्रेरकों ने अब डायट प्राचार्य के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है। डायट प्राचार्य पर कई तरह की अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए प्रेरकों ने बृहस्पतिवार को जिला मुख्यालय पर अनशन शुरू कर दिया। इनकी मांग है कि प्राचार्य के कार्यकाल में हुए कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही जांच के समय साक्षरता का प्रभार किसी अन्य अधिकारी को दिया जाए।
आदर्श प्रेरक/एमटी/मीटी/संघ साक्षर भारत मिशन के जिलाध्यक्ष जवाहर शर्मा के नेतृत्व में अनशन कर रहे प्रेरकों का कहना था कि नवीनीकरण के लिए 26 नवंबर से 09 दिसंबर तक क्रमिक धरना दिया गया। 18 दिसंबर तक नवीनीकरण प्रमाण पत्र देने के एसडीएम सदर के आश्वासन पर धरना समाप्त हो गया। लेकिन 16 दिसंबर को प्रेरकों के नए सिरे से चयन के लिए विज्ञापन जारी कर दिया गया। यह प्रेरकाें के साथ घोर अन्याय है। इससे नाराज होकर जिलाध्यक्ष जवाहर शर्मा और अन्य प्रेरकों ने डायट प्राचार्य के विरुद्ध उच्चस्तरीय जांच के लिए बृहस्पतिवार से कलेक्ट्रेट के सामने अनशन शुरू कर दिया। इनका आरोप है कि ग्राम स्तर से लगायत जिला स्तर तक लोक शिक्षा समिति में निदेशालय से मिले करीब 04 करोड़ रुपये का दुरुपयोग किया गया है। प्रशिक्षण के मद में मिले लगभग 09 लाख रुपये को डायट प्राचार्य ने टीए और अन्य निजी कार्य में खर्च कर दिया है। 230 विवादित ग्राम पंचायतों में से 150 ग्राम पंचायतों में कोई शिकायत न होने के बावजूद चयन निरस्त कर दिया गया। शेष 30 ग्राम पंचायतों में मामूली शिकायत पर प्रेरकों का चयन निरस्त कर दिया गया है। प्रेरकों के मुताबिक 628 प्रथम चरण के प्रेरकों के नवीनीकरण में 50 ऐसी ग्राम पंचायतें हैं, जहां ग्राम प्रधान एवं प्रधानाध्यापक की तरफ से कार्य प्रमाणित न होने बाद भी नवीनीकरण कर दिया गया है, जबकि 80 प्रेरकों की ओर से सुविधा शुल्क न दिए जाने के कारण नवीनीकरण प्रमाण पत्र नहीं दिया गया। बृहस्पतिवार को अनशन पर जिलाध्यक्ष समेत चार प्रेरक बैठे थे।