रामकोला। बृहस्पतिवार को रामकोला सीएचसी में महिलाओं को नसबंदी के बाद खुले में जमीन पर लिटा दिया गया। महिलाआें का कहना था कि ऐसी व्यवस्था की जानकारी उन्हें होती तो वे घर से ही कंबल लेकर आई होतीं। इसके पूर्व भी इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर इसी तरह की अव्यवस्था हुई थी, लेकिन फिर भी उसमें कोई सुधार नहीं हो सका है। ठंढ में ऐसी महिलाओं को काफी दिक्कतो का सामना करना पड़ा।
बृहस्पतिवार को रामकेाला सीएचसी पर नसबंदी शिविर का आयोजन किया गया था। सुबह से लोग शिविर में नसबंदी कराने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराने लगे थे। दोपहर तक ही 150 लोगों ने नसबंदी के लिए रजिस्ट्रेशन करा लिया था। दिन के करीब पौने दो बजे नसबंदी करने वाले डॉक्टर एए खान सीएचसी पहुंचे। एक घंटे बाद लगभग पौने तीन बजे नसबंदी का कार्य शुरू हुआ। नसबंदी करने के बाद लगभग आधा दर्जन महिलाओं को बेड मुहैय्या हो सका। उसके बाद नसबंदी वाली सभी महिलाओं को पहले तो सीएचसी के अंदर जमीन पर एक चादर के सहारे लिटा दिया गया। जब सीएचसी के अदंर जगह नहीं बची तो नसंबदी के बाद महिलाओं को खुले आसमान के नीचे एक चादर पर जमीन पर लिटाया जाने लगा। वह चादर भी नसबंदी कराने वालों का ही होता था। नसबंदी कराने के बाद ऐसी ही जमीन पर लिटाई गई गीता देवी, भरपटिया, राजकुमारी देवी, अनिता देवी, सुधा, पुनम देवी, सरिता देवी सहित कई महिलाओं ने बताया कि इस ठंढक में जमीन पर एक चादर देकर लिटा दिया गया है। इन लोगों का कहना था कि यदि ऐसी व्यवस्था की जानकारी पहले से ही होती तो वे ठंड से बचने के लिए अपने घरों से ही कंबल लेकर आई होती। इसके पूर्व वाले नसबंदी शिविर में भी इसी तरह की अव्यवस्था थी। उस समय सीएचसी के लोगों ने कहा था कि अगले बार से मरीजों के हिसाब से बिस्तर आदि की व्यवस्था कर ली जाएगी। लेकिन इस बार का भी नजारा वैसा ही रहा। किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं किए जाने से मरीजों के साथ उनके तीमारदारों ने कहा कि इस तरह की अव्यवस्था के बीच नसबंदी कराने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। इस बाबत सीएमओ डॉ. हरिगोविंद ने कहा कि अभी इसकी जांच कराकर व्यवस्था कराई जा रही है। अगली बार से पूरी व्यवस्था मुहैया कराने के बाद ही नसबंदी की जाएगी।