कसया। 2001 में मैत्रेय परियोजना से कुशीनगर के द्रुत गति से विकास की चर्चा चली लेकिन अब 13 दिसंबर 2013 को परियोजना का शिलान्यास होगा। हालांकि किसान आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। परियोजना के लिए फेज वन की जमीनों का पूरी तरह अधिग्रहण नहीं हो पाया है। फेज टू की जमीनों को सरकार ने परियोजना से विरत कर दिया, पर अधिग्रहण की अधिसूचना निरस्त नहीं हुई। 2006 में परियोजना के लिए 660 एकड़ भूमि की अधिसूचना जारी की गई थी। पर 2010 में किसानों के विरोध को देखते हुए तत्कालीन प्रमुख सचिव ने परियोजना का आकार 260 एकड़ में समेट दिया। उसके बाद से किसान आंदोलन थोड़ा मंद पड़ा। 260 एकड़ भूमि को फेज वन और 400 एकड़ भूमि को फेज टू नाम दिया गया।
2012 में सरकार ने फेज टू के 70 प्रतिशत किसानों की जमीनों पर करार करने के बाद मुआवजा भी दे दिया। पर इसी बीच कुछ किसानों ने हाईकोर्ट से स्थगनादेश प्राप्त कर लिया। उसके बाद करार और भुगतान की कार्यवाही रुक गई। तीन माह पूर्व मैत्रेय ट्रस्ट और सरकार के बीच पूरी तरह अधिग्रहित भूमि पर काम शुरू करने की सहमति बनी। शिलान्यास के लिए अब जाकर सीएम, ट्रस्टियों के आना निश्चित हुआ है।