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कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

Mon, 18 Nov 2013 05:40 AM IST
Kushinagar
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पडरौना। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर बांसी नदी की बड़ी गंडक और छोटी गंडक के घाटों पर पहुंचकर श्रद्धालुआें ने डुबकी लगाई। स्नान के बाद दान-पुण्य किया और मंदिरों में पूजा-अर्चना करके परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की। बांसी नदी के घाटों पर उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जनपदों के श्रद्धालु स्नान करने पहुंचे। देर रात तक सड़कें श्रद्धालुओं के आने से पटी रहीं। मेले में झूला, तमाशा वाले भी आए थे। रविवार को इनकी वापसी के समय भी सड़कों पर श्रद्धालुआें का तांता लगा रहा। मेले में लोगों ने जरूरत के सामान की खरीदारी की।
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पौराणिक मान्यता के अनुसार जनकपुर में विवाह के बाद भगवान राम बारातियाें के संग अयोध्या जाते समय यहां रात्रि विश्राम किए थे। इसीलिए इस स्थान का नाम बांसी पड़ा था। बांसी के बगल में ही रामघाट भी स्थित है। ऐसा कहा जाता है कि सौ बार काशी में स्नान करने से जो पुण्य मिलता है, वह बांसी में एक बार स्नान करने से प्राप्त हो जाता है। यही वजह है कि प्राचीन समय से ही कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर यहां भव्य मेला लगता है, जिसमें उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग स्नान करने आते हैं। इस बार भी बांसी नदी में स्नान करने के लिए श्रद्धालुआें की भारी भीड़ उमड़ी थी। इसके अलावा छोटी गंडक के रगड़गंज, हेतिमपुर घाट और जनपद की सीमा से सटकर गुजरने वाली बड़ी गंडक में भी बहुत से लोगों ने डुबकी लगाई। श्रद्धालुआें ने इन पवित्र नदियों में डुबकी लगाने के बाद गोदान किया और पूजा-अर्चना करके दान-दक्षिणा दी।
झूला और तमाशावालों ने भी किया आकर्षित
बांसी नदी में स्नान करने आए श्रद्धालुआें के मनोरंजन के लिए घाट पर झूला लगा था। तमाशावाले तरह-तरह के करतब दिखाकर लोगों का मनोरंजन कर रहे थे। कोई हाथ में खजड़ी लेकर खांटी लोकगीत सुना रहा था तो कोई रस्सी पर दौड़ रहा था। मौत का कुआं भी लोगों का ध्यान आकृष्ट कराने के लिए बनाया गया था। स्नान-दान के बाद लोगों ने इसका लुत्फ भी उठाया।
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सुरक्षा के लिए तैनात की गई थी पुलिस
बांसी घाट पर आए श्रद्धालुआें की सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस तैनात की गई थी। महिला पुलिस भी ड्यूटी पर लगाई गई थी।
लगे थे विभिन्न स्टाल
बांसी मेले में श्रद्धालुआें की सुविधा के लिए विभिन्न प्रकार के स्टाल लगे थे। वे पेयजल से लगायत अन्य जरूरत की सुविधाएं मुहैया करा रहे थे। एक काउंटर ऐसा भी बनाया गया था, जहां से खोए-मिले लोगों के बारे में सूचनाएं दी जा रही थीं।
गोदान का होता है काफी महत्व
तमकुहीरोड। कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद गोदान का विशेष महत्व है। इस दिन लोग मन्नत के अनुसार कोसी भी भरते हैं। इस बार भी सैकड़ों लोग रात्रि कल्पवास के दौरान नदी के किनारे कोसी भरे और स्थान पूजा के बाद गोदान किया। ऐसी धारणा है कि गोदान करने से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
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