पडरौना। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद भी चीनी मिल प्रबंधतंत्र ने पेराई सत्र शुरू करने की कोई तिथि निर्धारित नहीं की है। इससे गन्ना किसानाें में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। रबी की बुवाई का समय बीतता जा रहा है। हाथ खाली होने की वजह से किसानों के सामने एक ही विकल्प बचा है कि वे अपने वर्ष भर की मेहनत से कमाए गन्ने की फसल को क्रशर पर औने-पौने दामों पर बेच दें।
पूर्वांचल की चीनी मिलों को चलाने के लिए मुख्यमंत्री ने 25 से 30 नवंबर तक का समय निर्धारित किया है। गन्ना मूल्य निर्धारण के लिए लगातार वार्ता चल रही है। चीनी मिलों के प्रबंधतंत्र तथा किसानों से जुड़े लोग अपने-अपने तर्क से गन्ना मूल्य घोषित किए जाने की मांग कर रहे हैं। सीएम की घोषणा के बाद भी प्रबंधतंत्र अब तक चीनी मिलों के चलाने की घोषणा नहीं किए। उनका कहना है कि अपने संगठन से विचार-विमर्श कर रहे हैं जबकि घोषणा के अनुसार चीनी मिलों के चलाए जाने की निर्धारित तिथि में केवल 10 से 15 दिनों का समय ही शेष है।
इधर, किसानों के सामने रबी की बुवाई की समस्या है। उन्हें यह चिंता सता रही है कि अपने खेतों की बुवाई कैसे करें? बकाया गन्ना मूल्य दिलाने की बात दब सी गई है। इस पर किसी प्रकार की चर्चा नहीं होने से किसान मायूस हैं। खेती का कार्य तो अपने समय पर ही होगा इसलिए किसानों के पास एक ही विकल्प दिखाई दे रहा है कि हाड़तोड़ मेहनत से पूरे एक साल में तैयार किए गए अपने गन्ने को क्रशर संचालकों के हाथ आधे से कम दाम पर बेच दें। किसानों की इस मजबूरी का फायदा उठाकर क्रशर वाले औने-पौने दामों पर गन्ने की खरीद कर रहे हैं। पिछले पेराई सत्र में सामान्य प्रजाति का गन्ना का मूल्य 280 रुपये तथा अर्ली प्र्रजाति का गन्ना मूल्य 290 रुपये प्रति क्विंटल था। इस साल गन्ना मूल्य निर्धारित नहीं है लेकिन क्रशर वाले 150 से लेकर 170 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गन्ना खरीद रहे हैं। हर वर्ष यह देखने को मिलता है कि क्रशर संचालक गन्ने का रेट तभी बढ़ाते हैं, जब चीनी मिलों में पेराई सत्र आरंभ हो जाता है।
चीनी मिलों और किसानों के बीच गतिरोध दूर हो: राधेश्याम सिंह
पडरौना। किसानों की रहनुमाई कर मुकाम पाने वाले हाटा के विधायक राधेश्याम सिंह ने केंद्र सरकार से चीनी मिलों और गन्ना किसानों के हित में चीनी का आयात बंद करने की मांग की है। विधायक ने मुख्यमंत्री से गन्ना किसानों और चीनी मिलों के बीच का गतिरोध दूर कर चीनी मिलों को चलाने की मांग की है। हाटा विधायक ने अखबारवालों से कहा कि प्रदेश की किसी भी चीनी मिल ने अब तक पेराई सत्र का शुरू नहीं की है जबकि किसानों को गेहूं बोने के लिए खेत खाली करना है। ऐसे में मुख्यमंत्री को चाहिए कि वे पहल कर गन्ना किसानों और चीनी मिलों के बीच का गतिरोध दूर कराकर चीनी मिलों का पेराई सत्र शुरू कराएं। उन्हाेंने कहा कि बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान भी तत्काल किसानों को दिलाया जाए। हाटा विधायक ने आगे कहा कि केंद्र की सरकार को भी चीनी मिलों तथा किसानों के हित को देखते हुए विदेश से चीनी का आयात बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान होने के नाते किसानों के दुख-दर्द से वाकिफ हूं। किसानों की लड़ाई से ही यह मुकाम मिला है। प्रदेश और कें द्र की सरकार को यह जरूरी कदम उठाना चाहिए। धान की फसल वैसे ही खराब हो गई है। यदि अब यदि चीनी मिलें नहीं चलीं तो किसानों के गेहूं की फसल भी खराब होगी।