पडरौना/तमकुहीरोड। मंगलवार को गन्ना मूल्य निर्धारण को लेकर लखनऊ में चल रही बैठक पर गन्ना किसानों की निगाहें टिकी हुई थीं। बैठक बेनतीजा होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों को अब यह चिंता सताने लगी है कि क्या चीनी मिलें सरकार के घोषित तिथि के अंदर चलेंगी।
मुख्यमंत्री ने चीनी मिलों के पेराई सत्र चालू करने के लिए तिथियों की घोषणा कर दी है। इस घोषणा से किसानों को थोड़ी राहत मिली थी। उन्हें लगा कि अब चीनी मिलें चलेंगी। मंगलवार को गन्ना मूल्य निर्धारण के लिए हो रही बैठक में सहमति न बनने के कारण गन्ना मूल्य की घोषणा नहीं हो सकी। एक तरफ सरकार ने चीनी मिलों को चालू करने की तिथि घोषित कर दी है तो दूसरी तरफ चीनी मिलों से जुड़े लोगों का कहना है कि वे अपने एसोशिएसन से वार्ता के बाद ही कुछ कह पाने की स्थिति में होंगे। सरकार और चीनी मिल प्रबंधतंत्र के बीच चल रही रस्साकसी ने किसानों की चिंता को और बढ़ा दी है। राजनीतिक दलों के साथ-साथ किसानों ने भी बेबाकी से कहना शुरू कर दिया है कि किसान हितैषी सरकार का दावा करने वाली सरकार में गन्ना किसानों की सबसे अधिक दुर्दशा है। पिछले पेराई सत्र का गन्ना मूल्य अब तक बकाया है, लेकिन सरकार ऐसा कुछ भी नहीं कर पा रही है, जिससे बकाया गन्ना मूल्य किसानों को मिल सके। रामकोला के किसान आशुतोष गोविंद राव गोलू का कहना है कि किसानों की सरकार का दावा करने वाली सरकार की पोल खुल चुकी है। केंद्र सरकार ने इस पेराई सत्र में 40 रुपये गन्ना मूल्य बढ़ाया है, लेकिन प्रदेश की सरकार अब तक गन्ना मूल्य ही घोषित नहीं कर सकी है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा माहौल रहेगा तो आने वाले समय में किसान गन्ने की खेती से विमुख हो सकता है। वहीं सेवरही क्षेत्र के पिपराघाट के गन्ना किसान श्रीराम निषाद का कहना है कि यदि किसानों को लाभकारी मूूल्य नहीं दिया गया तो गन्ना किसान तबाह हो जाएंगे। गन्ना किसान परमेंदर जायसवाल का कहना है कि अब तक गन्ना मूल्य घोषित नहीं होने से सरकार की छवि पर असर पड़ रहा है।