कसया। पर्यटन सीजन की शुरुआत के दो सप्ताह बाद पर्यटन स्थली कुशीनगर चीन, म्यांमार, श्रीलंका और थाईलैंड की सैलानियों से गुलजार हुई। चीन से आए बौद्ध भिक्षुओं के एक 35 सदस्यीय दल ने महापरिनिर्वाण मंदिर बुद्ध की निर्वाण मुद्रा वाली प्रतिमा के समक्ष विशेष पूजा कर विश्व शांति की कामना की। अन्य देशों के पर्यटकों ने भी मंदिर में पूजन-अर्चन करने के साथ प्रतिमा पर चीवर अर्पित किया।
माथाकुंवर मंदिर में पानी भरा होने के कारण पर्यटक मंदिर में रखी 5वीं सदी की शयन मुद्रा बुद्ध प्रतिमा को नहीं देख सके। पर्यटकों ने रामाभार स्तूप समेत कुशीनगर के अन्य दर्शनीय स्थलों का भ्रमण किया। कुशीनगर में एक अक्टूबर से प्रारंभ पर्यटन सीजन के दौरान कई देशों के सैलानी एकसाथ पहली बार दिखे। 300 की संख्या में सैलानियों के आने से पर्यटन कारोबार से जुडे़ लोगों में उत्साह छा गया। चालू पर्यटन सीजन के बीते दिनों में सिंगापुर और मलेशिया के एक दल को छोड़कर सैलानियों का कोई बड़ा दल कुशीनगर नहीं आया था। पर्यटन कारोबारी उम्मीद जता रहे हैं कि अब सैलानियों के आगमन का सिलसिला चलेगा। गाइड वीरेंद्र मिश्र ने बताया कि बोधगया की घटना से सैलानियों के आने पर प्रभाव पड़ा है। गाइड के अनुसार स्थिति में सुधार धीरे-धीरे ही होगा।
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नहीं दिखे पर्यटक पुलिस के जवान
कसया। सैलानियों की सुरक्षा और मार्गदर्शन के लिए लगाए गए पर्यटन पुलिस के जवान कही नहीं दिखे। इससे कुशीनगर में पर्यटन पुलिस की तैनाती पर सवाल उठ रहे हैं। परिसर में 13 की संख्या में पर्यटक पुलिस के जवान तैनात हैं। इनकी तैनाती को एक साल से ऊपर होने जा रहा है। पर पर्यटन विभाग जवानों को वर्दी, बेल्ट ,कैप और बैज नहीं उपलब्ध करा सका। सूत्रों का कहना है कि बिना वर्दी की डयूटी से जवानों को कोई तव्वजो नहीं दे रहा। इससे वे डयूटी करने से कतरा रहे हैं।
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पर्यटन पुलिस के जवानों को वर्दी आदि मुहैया कराने के लिए प्रक्रिया चल रही है। जहां तक पर्यटकों की संख्या भी बढे़गी। टूरिज्म और सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियां सुरक्षा का माहौल बनाने में जुटी है।
पीके सिंह, उप निदेशक पर्यटक, बौद्ध सर्किट
फोटो सहित
सौहार्द चाहते हैं चीनी बौद्ध भिक्षु
कसया। सीमा पर भारत चीन के बीच भले ही तनातनी चल रही हो। पर बौद्ध सर्किट का भ्रमण कर रहा चीनी भिक्षुओं का एक 35 सदस्यीय दल दोनो देशों के बीच शांति और सौहार्द चाहता है। चीनी बौद्ध भिक्षुओं का मानना है कि विवाद का कारण राजनीतिक है। अच्छा होता कि दोनो देशों की सरकार परस्पर विकास के मुद्दे पर कार्य करती।
भारत से प्राचीन काल से ही आध्यात्मिक गहरा रिश्ता होने के बाद सीमा पर विवाद के प्रश्न पर युवा बौद्ध भिक्षु झाओ सी का कहना है कि विवाद राजनितिक कारणों से हो रहे हैं। चीन की आम जनता कोई विवाद नहीं चाहती। चीनी जनता को विश्वास है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच रिश्ता अच्छा होगा। चीन की जनता भारत को अपने पूर्वजों का देश मानती है। हर चीनी एक बार भारत आना चाहता है। झाओ सी ने भारतीय संस्कृति को अनुपम बताया। कहा कि अन्य देशों की संस्कृति में एकरूपता दिखती है। भारत में विविध संस्कृति है। भारत भ्रमण से विश्व भ्रमण का आभास होता है। चीन बौद्ध भिक्षुणी मिंग जेन का कहना था कि चीन में महिलाओं की स्थिति काफ ी अच्छी है। धर्म के मामले में भी महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार है। इस नाते उनको भिक्षुणी बनने में कोई दिक्कत महसूस नहीं होती। बुद्धिज्म पर आतंकवादी हमले के सवाल पर युवा बौद्ध भिक्षुणी का कहना था है कि आतंकवाद से केवल बुद्धिज्म को नहीं बल्कि पूरी मानवता पर खतरा है। इसके लिए सभी देशों को मिलकर साझा रणनीति बनानी होगी।
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सड़क और प्रसाधन की समस्या से चीनी पर्यटक दुखी
कसया। बौद्ध सर्किट की सड़कों को लेकर चीनी नागरिक खासे निराश दिखे। चीनी भाषा के जानकार और गाइड आशुतोष अक्सर चीनी पर्यटकों को लेकर कुशीनगर आते हैं। आशुतोष की मानें तो बौद्ध सर्किट की यात्रा के दौरान पर्यटकों को सबसे ज्यादा परेशान करने वाली समस्या सड़कों और प्रसाधन को लेकर है। चीनी पर्यटक आपस में इस पर चर्चा भी करते हैं और गाइडों से सवाल भी पूछते हैं।