रामकोला (कुशीनगर)। गन्ना किसानों की समस्या का कोई अंत होता नहीं दिख रहा है। गन्ना बोने से लेकर पैदा करने, मिल को सप्लाई करने और फिर भुगतान लेने के लिए किसानों को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं।
बताते हैं कि पहले पूर्वांचल का यह इलाका नील की खेती के लिए प्रसिद्ध था। बाद में अंग्रेजों ने यहां की माटी को पहचाना और गन्ने की बुआई शुरू कराई। पैदावार देख अंग्रेजों ने 1927 में प्रतापपुर में पहला चीनी मिल लगवाया। इसके बाद आठ सालों में देवरिया जिले में 14 चीनी मिलें लगीं। उस समय देवरिया और कुशीनगर एक जिला था। आज के कुशीनगर जिले में उस समय नौ चीनी मिलें थीं। भारी पैदावार के कारण जिले के कुछ इलाकों का गन्ना सरदारनगर चीनी मिल को भी जाया करता था। उस समय चीनी मिलों की पेराई क्षमता आज के अपेक्षा काफी कम थी लेकिन किसानों को गन्ना बेचने से लगायत भुगतान पाने तक में कहीं परेशान नहीं होना पड़ता था। भारत आजाद हुआ तो एक-एक कर चीनी मिलें बंद होती गईं। आज कुशीनगर में चालू हालत में केवल चार चीनी मिलें हैं। पडरौना की चीनी मिल बंद होने के बाद चली जरूर लेकिन इसको लेकर ऊहापोह बना रहता है। वर्तमान पेराई सत्र में सरकार ने गन्ना मूल्य ही घोषित नहीं किया है। इससे किसानों में ऊहापोह की स्थिति है।
पिछड़ापन भी कम जिम्मेदार नहीं
जिले में छोटे किसानों की संख्या 85 फीसदी है। इनके पास अच्छे किस्म के छिड़काव व अन्य नये प्रकार की नई तकनीकी वाले संयत्र नहीं हैं। किसानों के पिछड़ापन के लिए यह भी जिम्मेदार हैं। केन यूनियन के शांतीश शाही कहते हैं कि जब तक किसानों की समस्याओं का निराकरण नहीं होगा, तब तक इस उद्योग का भला होने वाला नहीं है।
खड्डा चीनी मिल में पेराई आज से
इस साल मिल को एलाट हुआ है 44 लाख कुंटल गन्ना
अमर उजाला नेटवर्क
कुशीनगर। आईपीएल ग्रुप की खड्डा चीनी मिल शुक्रवार से पेराई सत्र शुरू करेगी। मिल के प्रबंधक निदेशक डा. पीएस गहलोत पूजन करके इस सत्र की शुरुआत कराएंगे। चीनी मिल को इस पेराई सत्र में मदनपुर ए तथा सोहगीबरवां क्रय केंद्र क्षेत्र का भी गन्ना एलाट हुआ है।
चीनी मिल के प्रधान प्रबंधक नरेश पाल और गन्ना प्रबंधक टीएस राणा ने बताया कि आईपीएल ग्रुप की खड्डा चीनी मिल को पिछले साल उन्नीस लाख कुंटल गन्ना एलाट हुआ था। मिल ने अपने पेराई सत्र में शत-प्रतिशत गन्ना पेराई करते हुए किसानों का भुगतान भी कर दिया। इस साल मदनपुर ए तथा सोहगीबरवां क्रय केंद्र का गन्ना भी खड्डा चीनी मिल को एलाट हुआ है। वहां मिल ने अपना कांटा भी लगवा दिया है। मिल की पेराई क्षमता में भी वृद्धि हुई है। इस साल 22000 कुंटल प्रतिदिन पेराई होगी। मिल के इन दोनों अधिकारियों ने बताया कि अभी उनके क्षेत्र में सिर्फ आठ से दस प्रतिशत किसान ही अगेती प्रजाति का गन्ना बो रहे हैं। इसे बढ़ाने के लिए मिल की तरफ से प्रयास किया जा रहा है। इस वर्ष 95422 और 92423 प्रजाति का भी गन्ना लिया जाएगा लेकिन अगले साल से इसे प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।