वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल में ट्रेनर।
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खड्डा (कुशीनगर)। बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में नक्सली गतिविधियों और तस्करों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। इनसे तमिलनाडु की तर्ज पर निपटा जाएगा। इसके लिए वन कर्मियों को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी जे सुरेश निभाई है। इंस्पेक्टर जे सुरेश चंदन तस्कर वीरप्पन को मुठभेड़ में मार गिराने वाले स्पेशल टॉस्क फोर्स में शामिल रहे थे। प्रशिक्षण 21 ले 24 सितंबर के बीच दिया गया। इसके तहत वन कर्मियों को अत्याधुनिक हथियार चलाना, धात लगाकर वन अपराधियों को पकड़ने की कला, विभिन्न जानवरों की आवाज निकालना और अपराधियों के संबंध में सूचनाएं एकत्र करने का कौशल सिखाया गया।
जिले के खड्डा क्षेत्र से सटा बिहार का वाल्मीकि टाइगर रिजर्व करीब 855 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यह जंगल नेपाल के चितवन प्राणी उद्यान से लगता है। नक्सली वन क्षेत्र को शरणस्थली के रूप में इस्तेमाल करते हैं। यहां शिकारी भी सक्रिय हैं, जो वन्यजीवों की हत्या कर उनके अंगों की तस्करी में जुटे हुए हैं। नक्सली और तस्कर वन कर्मियों के लिए मुसीबत बन गए हैं। इनसे निपटने के लिए वन कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है।
राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित इंस्पेक्टर जे सुरेश ने बताया कि वह अब तक उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश में 400 वन कर्मियों को प्रशिक्षित कर चुके हैं। बिहार में उन्होंने पहली बार 100 वन कर्मियों को प्रशिक्षित किया है। ये वन कर्मी अन्य सहकर्मियों को प्रशिक्षित करेंगे। जे सुरेश ने बताया कि वन तस्कर वन्यजीवों की हत्या कर उनके अंगों की तस्करी करते हैं। स्थानीय तस्करों को वन की भौगोलिक स्थिति की अच्छी जानकारी होती है। इस वजह से वनकर्मी तस्करों तक पहुंच नहीं पाते। इनसे निपटने के लिए वनकर्मियों के लिए प्रशिक्षण जरूरी है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के सहयोग से प्रशिक्षण के बाद हाईटेक व अत्याधुनिक असलहे से लैस वनकर्मी की टीमें अतिसंवेदनशील इलाकों में तैनात की जाएगी। संस्था के वरिष्ठ प्रबंधक कमलेश मौर्या व शरीक शफी, डॉक्टर आईपी गोपन्ना, विक्रम सिंह तोमर व बीटीआर के वन संरक्षक सह क्षेत्र निदेशक एस चंद्रशेखर ने बताया की चार दिन तक चलने वाला यह प्रशिक्षण वन अपराधियों को पकड़ने में काफी कारगर साबित होगा।