कसया। महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में संचालित पुरातत्व कार्यालय में बैठे जिम्मेदार बहुमूल्य धरोहरों की सुरक्षा और संरक्षण से मुंह मोड़ लिया है। इसकी एक बानगी ऐतिहासिक माथा कुंवर बुद्ध मंदिर में देखने को मिल रहा है। यहां पर जल-जमाव से मंदिर और आगे स्थित धरोहर पूरी तरह जल में डूबे पड़े हैं। इससे इन अवशेषों का क्षरण हो रहा है। जबकि विभाग के जिम्मेदार लोग इस महत्वपूर्ण मंदिर और उत्खनित अवशेषों के संरक्षण के लिए वर्षों से कोई ठोस इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं। वहीं इस अव्यवस्था से आने वाले श्रीलंकाई पर्यटकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मंदिर के सामने जल भराव को देखकर जहां पर्यटक मायूस हैं, तो वहीं दूसरी ओर युवक स्विमिंग पूल की तरह मंदिर के सामने भरे जल में आनंद ले रहे हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इस पर पूरी तरह से मौन साधे हुए है। वजह धरातल से काफी नीचे होने के कारण मंदिर में भारी जलजमाव की स्थिति है। स्मारकों का नुकसान हो रहा है तो दुर्घटना की भी आशंका बनी रहती है। इन्हें रोकने के लिए विभाग कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। विदेशी पर्यटक इस दृश्य को अपने कैमरों में कैद कर रहे है। इस मंदिर में तथागत की 11 वीं सदी की भू-स्पर्श मुद्रा में प्रतिमा स्थापित है। इसका निर्माण तत्कालीन कलचुरि राजा के समय में हुआ था। प्रतिमा 1876 की पुरातात्विक खोदाई में प्राप्त हुई थी। इस बावत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण सारनाथ मंडल, वाराणसी के अधीक्षण पुरातत्वविद नीरज कुमार सिन्हा का कहना है कि जलभराव की समस्या के समाधान के लिए महानिदेशक, नई दिल्ली से एक टीम भेजने के लिए आग्रह किया गया है।