गुरुद्वारे में श्ाबद-कीर्तन सुनते लाेग।
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रामकोला (कुशीनगर) । सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानकदेव का जन्मोत्सव प्रकाश पर्व के रूप में शनिवार को धूमधाम से मनाया गया। रामकोला की त्रिवेणी चीनी मिल स्थित गुरुद्वारा में सुबह से शबद कीर्तन प्रारंभ हुआ। ज्ञानी यशवीर सिंह ने गुरु नानकदेव का उपदेश सुनाया। इस शबद कीर्तन में रामकोला, पडरौना, कप्तानगंज और घुघली सहित कई स्थानों से सिख धर्म के अनुयायी शामिल हुए।
ज्ञानी यशवीर सिंह ने कहा कि गुरु नानक के सत्संग की बदौलत सिख धर्म को मानने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोत्तरी होती गई। उन्होंने भटके हुए लोगों को सही राह दिखाया तथा आडंबरों से दूर रहने का संदेश दिया। समाज को नई दिशा देने के लिए वह 25 वर्षों तक अपने शिष्यों के साथ भ्रमण करते रहे। उन्होंने 1522 में करतारपुर साहिब नगर बसाया। वहां लहनाजी गुरु नानकदेव की सेवा में हाजिर हुए और सात साल की समर्पित सेवा के बाद गुरु नानक के उत्तराधिकारी के रूप में शोभायमान हुए। धर्म प्रचार करते हुए गुरु नानक करतारपुर साहिब में 22 सितंबर 1539 को ज्योति-जोत में समा गए।
शबद कीर्तन के दौरान गुरुद्वारा में चीनी मिल के उपाध्यक्ष एमए कुरैशी, कारखाना प्रबंधक मानवेंद्र राय, बैकुंठ शाही, सरदार इंद्रजीत सिंह, गायक अनीस सोनी, डॉ. अरुण गौतम, डॉ. शुभ्रा गौतम, कुमुद चड्ढा, अंजना चड्ढा, शशीनंदा, जगदीश चावला, कमलराज मधोक, शैलेंद्र त्रिपाठी, जसपाल सिंह, जसवीर सिंह, प्रतिपाल इिसंह, शिवम् चड्ढा, संजय चावला, सुनील चड्डा, गौरव नंदा सहित अन्य लोग मौजूद थे।