कुशीनगर। ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं की स्थिति काफी दयनीय है। इंसेफेलाइटिस की चपेट में आने से नौनिहालों की मौत के बाद भी पेयजल आपूर्ति को लेकर कोई सक्रियता नहीं दिख रही है। कई गांवों में ओवरहेड टैंक अधूरे पड़े हैं। रकम के अभाव में 82 परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं।
तहसील क्षेत्र के गांव भैंसहा के नौका टोला में लाखों रुपये की लागत से बना ओवरहेड टैंक लोगों के लिए अनुपयोगी साबित हो रहा है। आज तक इस टैंक के जरिए जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी। ऐसे में स्वच्छ पेयजल न मिलने के कारण लोगों को साधारण हैंडपंपों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इस गांव की आबादी लगभग दस हजार है। ग्रामीणों की मांग पर राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना के तहत शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए दो वर्ष पूर्व ओवरहेड टैंक बनकर तैयार हो गया, लेकिन पाइप लाइन का कार्य अभी शुरू ही हुआ नहीं है। ओवरहेड टैंक के निर्माण में लाखों रुपये खर्च हुए हैं। इसके अलावा आपरेटर के लिए आवास सहित अन्य कार्य पूरा कराए गए, लेकिन जलापूर्ति शुरू नहीं हो पाई है।
गांव के रवि शंकर सिंह व योगेंद्र कुशवाहा का कहना है कि ओवरहेड टैंक का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। लोग शुद्ध पानी के लिए तरस रहे हैं। शिकायत के बाद भी विभागीय अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। दूषित पानी के सेवन से पेटदर्द, डायरिया, पेचिश सहित विभिन्न बीमारियों से लोग ग्रसित हो रहे हैं। वीरेंद्र सिंह कहना है कि ओवरहेड टैंक के निर्माण से उम्मीद जगी थी, लेकिन अब जलापूर्ति नहीं होने से परियोजना छलावा लग रही है। ग्राम प्रधान प्रतिभा देवी का कहना है कि ओवरहेड टैंक के जरिए जलापूर्ति आ रही तकनीकी समस्या को दूर करने के लिए विभागीय अधिकारियों से शिकायत की गई है। जल निगम के जेई प्रमोद कुमार राम त्रिपाठी का कहना है कि यहां ओवरहेड टैंक बनवाने के लिए केवल अनुबंध हो पाया। अन्य कार्यों के लिए अनुबंध नहीं हो पाया है। कसया तहसील क्षेत्र के गांव मंगलपुर में 99 लाख रुपये की लागत से 150 किलोलीटर क्षमता के ओवरहेड टैंक का निर्माण चल रहा है। मैनपुर में एक ओवरहेड टैंक 300 लीटर दूसरा 400 लीटर क्षमता का कुल 5.29 करोड़ की लागत से बन रहा है। सांसद राजेश पांडेय के गोद लिए गांव गोपालगढ़ में पेयजल के लिए कुल 148.96 लाख रुपये की परियोजना स्वीकृत है, जिसमें से केवल 37 लाख रुपये खर्च से ओवरहेड टैंक का निर्माण चल रहा है। यहां पर जलापूर्ति के लिए पाइप लाइन का कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। इसके अलावा अनिरुद्धवा गांव में भी पानी की टंकी का निर्माण चल रहा है। वहीं, कुड़वा दिलीपनगर में ओवरहेड टैंक सहित पूरी परियोजना ग्राम पंचायत को हैंडओवर करने के बाद भी जलापूर्ति नहीं हो पा रही है।
जिले में पाइप लाइन के जरिए जलापूर्ति की कुल 82 परियोजनाएं हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अप्रैल माह में ही जल निगम की धीमी कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर करते हुए समयबद्ध ढंग से कराए जाने की सख्त हिदायत दी थी, लेकिन विभाग का कहना है कि इन परियोजनाओं के लिए अभी तक रकम ही नहीं मिली है। वहीं जल निगम के एक्सईएन प्रमोद कुमार गौतम ने परियोजनाओं की धीमी प्रगति की वजह धन की अनुपलब्धता बताई। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को चालू करने के लिए पूरी रकम नहीं उपलब्ध हो पाई है। इसके चलते अधूरी पड़ी है।