दूषित जल पीने से बिगड़ रही सेहत, ऊसर हो रही जमीन
पिडारी गांव की इंद्रावती को दो बेटों को खोने का है गम
कई अन्य बच्चे हो चुके हैं दिव्यांगता के शिकार, परिजन हैं परेशान
संजीव कुमार मिश्रा
रामकोला। जेई व एईएस की रोकथाम के लिए जहां शासन-प्रशासन गंभीर है, वहीं नगर पंचायत रामकोला से सटे गांव पिडारी में पीने का पानी दूषित हो गया है। दूषित जल के सेवन से लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। इस गांव के कई बच्चे दिव्यांगता के शिकार भी हो गए हैं। इसके अलावा गंदा पानी अगल-बगल के कई गांवों की जमीन को ऊसर भी बना रहा है। हालत यह है कि गांव के चारों तरफ एकत्र काले रंग का पानी भी दिखाई देने लगा है। लोग यही कह रहे हैं कि इसी वजह से हैंडपंप का पानी गंदा हो जा रहा है और उसके सेवन से लोगों की सेहत बिगड़ रही है।
पिडारी गांव रामकोला कस्बे से सटा हुआ है। इस गांव के चारो तरफ दूषित काला पानी ही दिखाई दे रहा है। इस गंदे पानी की वजह से यह स्थिति हो गई है क्षेत्र के धर्मसमधा, इंद्रसेनवा, कुसमी, रामकोला देहात समेत कई गांवों की खेती योग्य जमीन ऊसर होती जा रही है। गंदे पानी के कारण किसानों की फसल बर्बाद हो रही है वहीं हैंडपंप से निकलने वाले दूषित पानी का सेवन करने से लोगों की सेहत बिगाड़ रही है। पिडारी गांव की इंद्रावती बताती हैं कि सात साल पहले उनके बेटे शैलेश (8 व रितेश (11) को दूषित पानी पीने की वजह से बीमारी हो गई थी। उपचार के बाद भी सेहत नहीं सुधरी और दोनों बेटों की मृत्यु हो गई। इंद्रावती देवी का दर्द है कि यदि गंदे पानी का कहर नही होता तो उनके दोनो बेटे आज जिंदा होते। इसी गांव के रहने वाले हरि प्रसाद बताते है कि गंदा पानी पीने की वजह से उनका 18 वर्षीय पुत्र सोनू एक हाथ से दिव्यांगता का शिकार हो गया है। सोनू के बड़े भाई अच्छे लाल की 12 वर्षीया बेटी विनीता का भी यही हाल है। वह तो मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से दिव्यांग हो गई है। ना तो वह सीधे खड़ी हो सकती है और ना सीधे चल सकती है न बोल तो सकती है। मानसिक रूप से काफी अस्वस्थ है। इसी गांव के सिंहासन यादव बताते है कि उनके 12 वर्षीय पुत्र जग्गू की जिंदगी तो अब पहाड़ सी लगने लगी है। जग्गू की एक आंख की रोशनी ही चली गई है। किशोर की जिंदगी कैसे कटेगी, इसको सोच कर सिंहासन परेशान हैं। एसडीएम कप्तानगंज प्रमोद कुमार ने बताया जलजमाव की समस्या दूर कराने के लिए जल निकासी की समुचित व्यवस्था कराई जाएगी। पिडारी गांव में लगे हैंडपंपों के पानी की जांच कराई जाएगी। लोगों को शुद्ध पानी मिले, इस दिशा में सार्थक कदम उठाए जाएंगे। दिव्यांगता के शिकार लोगों को भी जरूरी सुविधाएं दिलाने की कोशिश की जाएगी।