गंडक में समाए हथिसार समेत दस और मकान
- दो दिन में 70 मीटर कटान, अपने हाथों अपना आशियाना उजाड़ रहे लोग
- ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन पर लगाया देरी से बचाव कार्य शुरू करने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
तमकुहीरोड। अहिरौलीदान में बृहस्पतिवार की सुबह धुरंधर सिंह का हथिसार (हाथी बांधने का स्थान) गंडक नदी में समा गया। इसके साथ ही 10 और मकान नदी में समा गए। दो दिन में कचहरी टोला में 70 मीटर तक कटान हुआ है। नदी को गांव की ओर बढ़ते देख लोग अपने हाथों से अपना आशियाना उजाड़ने में जुटे हुए हैं। लोगों का कहना है कि अगर ऐसा ही रहा तो गांव का वजूद मिट जाएगा। ग्रामीणों ने शासन- प्रशासन पर देरी से बचाव कार्य शुरू कराने का आरोप लगाया है।
पांच अगस्त से अहिरौलीदान में गंडक नदी कटान कर रही है। प्रशासन की ओर दावे तो किए जा रहे हैं , लेकिन वह गांवों को कटान से बचाने को लेकर गंभीर नहीं है। मकान नदी में समा रहे हैं और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। एक-एक कर 100 से अधिक लोग अपने पक्के मकान तोड़वा चुके हैं। गांव के धुरंधर सिंह के दो आलिशान भवन, एक गोदाम नदी में समा चुके हैं। बृहस्पतिवार को उनका हथिसार भी नदी में समा गया। हाथी को उसके स्वामी ने सुरक्षा के लिहाज से महावत को सौंप दिया है।
बृहस्पतिवार को धुरंधर सिंह के हथिसार के अलवा सुजीत यादव, रविंद्र सिंह, ईश्वर सिंह, हरिलाल सिंह, नंदकिशोर सिंह, रामध्यान सिंह समेत दस लोगों के मकान नदी में विलीन हो गए। उधर, बलिराम सिंह, हरेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, सुरेश सिंह, संतोष सिंह, धर्मेंद्र सिंह, केदार, बिंदेश्वरी सिंह, श्याम सुंदर सिंह, हीरा सिंह व अन्य कई लोग अपने पक्के मकानों को तोड़वाने में जुटे हुए हैं। लोगों ने तबाही के लिए शासन, प्रशासन और सिंचाई विभाग को दोषी ठहराया है। ग्राम प्रधान हीरालाल यादव, जिला पंचायत सदस्य अरविंद सिंह पटेल, जितेंद्र कुमार सिंह, रूदल राम, रामाज्ञा सिंह, सुशील सिंह, मंटू सिंह, अरविंद सिंह का कहना है कि समय से बचाव कार्य शुरू कराया गया होता तो आज स्थिति ऐसी नहीं होती।