साथियों की याद में थानों पर नहीं मनाई जाती है जनमाष्टमी
वर्ष 1994 में डकैतों से हुए मुठभेड़ में शहीद हो गए थे छह पुलिसकर्मी
शहीद हुए पुलिसकर्मियों की याद में पडरौना कोतवाली में बना है गेट
शोभित कुमार पांडेय
पडरौना। तीन सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी है। प्रदेश भर में पुलिस थानों पर कृष्ण जन्माष्टमी हर्षोल्लास से मनाने की तैयारियां चल रही हैं, लेकिन कुशीनगर जिले की पुलिस थानों पर कृष्ण जन्माष्टमी नहीं मनाती है। इसके पीछे वजह यह है कि 24 वर्ष पहले कृष्ण जन्माष्टमी की रात में जंगल पार्टी के डकैतों और पुलिस के बीच हुई मुठभेड़ में छह पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी, तभी से यहां की पुलिस साथियों को खोने के दर्द की वजह से थानों पर जनमाष्टमी नहीं मनाती है।
देवरिया से अलग होकर कुशीनगर नाम से वर्ष-1994 में जिले का सृजन हुआ। इसी वर्ष यहां के पुलिसकर्मी थानों पर कृष्ण जन्माष्टमी को धूमधाम से मनाने में जुटे हुए थे। इसी बीच पुलिस को कुबेरस्थान थाने के पचरूखिया घाट के पास जंगल पार्टी के कुछ डकैतों के मौजूद होने की सूचना मिली। तत्कालीन एसओ अनिल पांडेय अन्य पुलिसकर्मियों के साथ डकैतों को पकड़ने निकल गए। उस समय नदी को पार करने के लिए कोई पुल नहीं था। नाव ही एक मात्र साधन था। नाव पर सवार होकर पुलिसकर्मी बांसी नदी को पाकर डकैतों के छिपने की जगह पर जा रहे थे। डकैतों के नहीं मिलने पर पुलिस टीम कर लौट रही थी। जैसे ही पुलिसकर्मियों की नाव नदी की बीच धारा में पहुंची, तभी डकैतों ने पुलिस पर अंधाधुध फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने भी जबाब में गोलियां दागी, लेकिन नाविक को गोली लग जाने से नाव अनियंत्रित होकर पलट गई। डूब रहे लोगों में से तीन पुलिसकर्मी तैर कर बाहर आ गए, लेकिनसओ अनिल पांडेय, एसआई राजेंद्र यादव, कांस्टेबल नागेंद्र पांडेय, कांस्टेबल खेदन सिंह, कांस्टेबल विश्वनाथ यादव और परशुराम गुप्ता की मौत हो गई। इस घटना के बाद कुशीनगर पुलिस के लिए जन्माष्टमी अभिशप्त हो गई। इस घटना की कसक अब भी पुलिसकर्मियों के जेहन में है। इसी कारण किसी थाने और पुलिस लाइन में जन्माष्टमी नहीं मनाई जाती है। एसपी अशोक कुमार पांडेय ने बताया कि यह सच है कि वर्ष-1994 की घटना के बाद से यहां सामूहिक रूप से पुलिसकर्मी जनमाष्टमी नहीं मनाते हैं,लेकिन व्यक्तिगत रूप से लोग मनाते हैं।