कसया। भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में उत्खनित प्राचीन अवशेष व धरोहर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की लापरवाही के कारण बारिश के पानी में डूब गई हैं। जलभराव से इन अवशेषों का क्षरण होने के साथ उनके मूल स्वरूप में परिवर्तन होने का अंदेशा जताया जाने लगा है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की देखरेख में प्रमुख रूप से तीन स्थल हैं। इनके संरक्षण एवं सुरक्षा की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी विभाग के पुरातत्व संरक्षण अधिकारी की है। इनकी देखरेख करने के लिए पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का कुशीनगर में उपमंडल कार्यालय भी है, जहां पर एक वरिष्ठ पुरातत्व संरक्षण अधिकारी तैनात हैं। इसके बावजूद भी महापरिनिर्वाण मंदिर के बगल में स्थित उत्खनित महत्वपूर्ण पुरावशेष व रामाभार स्तूप जाने वाले मार्ग पर स्थित पवित्र माथा कुंवर मंदिर व उसके सामने उत्खनित अवशेष पानी में डूबे हुए हैं, जबकि इस मंदिर में भगवान बुद्ध की भू स्पर्श मुद्रा में लाल बलुए पत्थर से बनी एक भव्य मूर्ति स्थापित है।
पुरातत्वविद संरक्षण सारनाथ मंडल, सारनाथ के अधीक्षण डॉक्टर नीरज कुमार सिन्हा ने बताया महापरिनिर्वाण मंदिर के तीन तरफ की ठंडक और बरसात के मौसम की तस्वीर के साथ एक विस्तृत रिपोर्ट बनाकर दिल्ली मुख्य कार्यालय को भेजा गया है। इस रिपोर्ट में विभाग को एक टीम गठित कर निरीक्षण करने के लिए अनुरोध किया गया है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की प्रमुख गतिविधियां:
पुरातात्विक अवशेषों और उत्खनन कार्यों का सर्वेक्षण, केंद्र सरकार की सुरक्षा वाले स्मारकों, स्थलों और अवशेषों का रखरखाव और परीक्षण, स्मारकों और भग्नावशेषों का रसायनिक बचाव, स्मारकों का पुरातात्विक सर्वेक्षण, शिलालेख संबंधी अनुसंधान का विकास और मुद्राशास्त्र का अध्ययन, स्थल संग्रहालयों की स्थापना और पुनर्गठन, विदेशों में अभियान, पुरातात्विक विज्ञान में प्रशिक्षण और तकनीकी रिपोर्ट एवं अनुसंधान कार्यों का प्रकाशन।