तमकुहीरोड। गंडक नदी तेजी के साथ कटान कर रही है। अहिरौलीदान के कचहरीटोला का अस्तित्व खतरे में है। गांव के तीन चौथाई घरों को नदी अपनी धारा में विलीन कर चुकी है।
अहिरौलीदान का कचहरीटोला कभी बिजली, सड़क, पानी एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं से लैस रहा है और यहां की आबादी काफी खुशहाल रही है, लेकिन अब इस गांव के लिए गंडक नदी अभिशाप बन गई है। कंचनटोला और चित्तू टोला की तरह कचहरीटोला का वजूद भी अब मिटने के कगार पर पहुंच गया है। नदी ने अब तक इस गांव के तीन चौथाई हिस्से को अपनी धारा में विलीन कर लिया है और जो मकान शेष बच गए है, उनको भी दिन रात तोड़ने का सिलसिला जारी है। गुुरुवार को देखते ही देखते ललित सिंह का दो मंजिला मकान नदी की धारा में विलीन हो गया। जबकि शुक्रवार को भी यही स्थिति रही और धुरंधर सिंह का मकान भी कटान की जद में आ गया। यह मकान कभी भी गंडक की धारा में विलीन हो सकता है। नागेंद्र सिंह, मदन शर्मा, ज्ञानी सिंह, हीरा सिंह, नन्हे सिंह, बंका सिंह, छोटेलाल सिंह सहित कई अन्य लोग भी अपने मकानों को तोड़ने और उसका मलवा हटाने में लगे रहे। गांव के जिला पंचायत सदस्य अरविंद सिंह पटेल, ग्राम प्रधान हीरालाल यादव, जितेंद्र कुमार सिंह, सुजीत यादव, मजिस्टर पासवान, सुशील सिंह, मोहन यादव, शिवनाथ ने बताया कि हजारों की आबादी वाला गांव पिछले दस बारह दिनों से बर्बाद हो रहा है। यहां के लोगों की जीवन भर की पूंजी गंडक नदी की कटान की भेंट चढ़ रही है। शासन व प्रशासन की की ओर से पीड़ितों की सुधि तक नहीं ली जा रही है। गंडक नदी अब तक अहिरौलीदान का बैरिया टोला, कंचनटोला, चित्तू टोला, भिंडटोला, पिपराघाट का फलटोला, गोबर्धनटोला, नान्हू टोला, एकरीटोला तथा दुदही क्षेत्र से खुरहुरिया, बक्सर, किशुनवा, रक्तहिया, कौवाखोर, महुअवा, भगवानपुर और अन्य कई गांवों का वजूद मिटा चुकी है।