मेले में कहां से पहुंची शराब, कौन है जिम्मेदार
- सेवरही डाक बगले में ढाई घंटे चली निलंबित अफसरों और कर्मियों से पूछताछ
- पीड़ित परिजनों और निलंबित कर्मियों के बयान में अंतर को परखेगी टीम
- बिहार सीमा और गंडक से जुडी समस्याएं भी जानी टीम
शोभित कुमार पांडेय
कुशीनगर। तरयासुजना क्षेत्र में शराब पीने से हुई मौतों की वजह टटोलने में एसआईटी टीम का अधिक जोर रहा। प्रभावित गांवों के रहने वाले पीड़ितों और निलंबन की कार्रवाई की जद में आए पुलिस व आबकारी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से अलग-अलग पूछताछ की। शराब पीने से हुई मौतों के बाद शवों का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों से भी राय जानी। वैसे जांच टीम यह जानने की कोशिश कि आखिर क्षेत्र में अवैध शराब की खेप कहां से पहुंचती है और इसका जिम्मेदार कौन है। बिहार की सीमा और गंडक की क्या समस्याएं है। सतर्कता के बावजूद ऐसी घटनाएं क्यों घटती है और इसकी पुनरावृत्ति को रोकने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जाने की जरूरत है। पूर्व में शराब और उससे जुड़े कारोबारियों पर हुई कार्रवाई का ब्यौरा भी पता किया।
एसआईटी टीम की पांच सदस्यीय टीम पहले प्रभावित गांवों के पीड़ित परिवारों और बीमार होने के बाद स्वस्थ्य हुए लोगों से मुलाकात कर घटना की विस्तृत जानकारी जुटाई। उनके बयान को दर्ज भी किया। इसके बाद एसआईटीम सेवरही स्थित डाक बगले में पहुंची,जहां पहले से आबकारी विभाग के निलंबित डीओ व निलंबित आबकारी इंस्पेक्टर समेत अन्य निलंबित सिपाहियों से पूछताछ की। इसी कडी में निलंबित सीओ , निलंबित इंस्पेक्टर तरयासुजान, हल्का दारोगा ,सिपाही और पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के पैनल से जुड़े चिकित्सकों से भी पूछताछ की। सूत्रों की माने तो जांच टीम का अधिक जोर शराब के निर्माण,विक्री और प्रकार को लेकर रहा। शराब यहां बनती है अथवा ट्रांजिट होती है। बिहार की सीमा से तरयासुजान क्षेत्र के जुड़े होने और फिर गंडक नदी की स्थिति को लेकर भी शराब के कारोबार को जोड़ कर जानने की कोशिश की। अवैध शराब को लेकर पूर्व में क्या कार्रवाई हुई और कितने बड़े माफिया कार्रवाई की जद में आए। घटना में किन- किन ऐसे कारोबारियों और उनके संरक्षणदाताओं पर कार्रवाई नहीं हो पाई है। सूत्रों की माने तो टीम ने यह भी जानने की कोशिश की क्या- क्या कदम उठाने की जरूरत है, जिसकी वजह से ऐसी घटना फिर दुबारा न घटित हो। करीब ढाई घंटे तक सेवरही डाक बगले में एसआईटीम टीम की अलग-अलग लोगों से पूछताछ कर जानकारी जुटाई। वैसे जांच अधिकारी एडीजी रेलवे संजय सिंघल ने सिर्फ इतना बताया कि हर पहलुओं पर जांच हो रही है। जांच रिपोर्ट तैयार करने के लिए सभी पहलुओं पर मंथन किया जा रहा है। जांच पूरी करने के बाद रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएंगी।