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लड़खड़ाई दिव्यांग बच्चों की शिक्षा व्यवस्था

Mon, 26 Nov 2018 10:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कुश्ाीनगर
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पडरौना नगर में संचालित एक्सीलेरेटेड लर्निंग कैम्प। - फोटो : अमर उजाला
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पडरौना। संसाधनों और शिक्षकों की कमी की वजह से दिव्यांग बच्चों का भविष्य संकट में है। दिव्यांग के जीवन को संवारने को जिले में संचालित समेकित शिक्षा व्यवस्था लचर है। आलम यह है कि जरूरत के हिसाब से शिक्षकों की तैनाती नहीं हो पाई। जिम्मेदार भी शासन की ओर से व्यवस्था मुहैया नहीं कराए जाने की बाते बता रहे है।
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हाउस होल्ड सर्वे की रिपोर्ट की मानें तो जिले में 4837 दिव्यांग बच्चे चिंहित किए गए हैं। इसमें से 4756 दिव्यांग बच्चों को जिले के परिषदीय विद्यालयों में नामांकन कराया गया। इनको शिक्षित कर समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए राज्य परियोजना के तहत प्रत्येक ब्लॉकों में दो से तीन अध्यापकों की तैनाती की गई है। इस हिसाब से जिले में 45 इंटीनरेट टीचर, एक रिसोर्स टीचर, एक फिजियोथेरेपिस्ट और एक जिला समन्यवक नियुक्त किए गए है। यह अध्यापक सप्ताह में रूटीन के हिसाब से विद्यालय में पहुंच कर दिव्यांग बच्चों की काउंसलिंग करते हैं, लेकिन दिव्यांगों की शिक्षा रफ्तार पकड़ते ही सुस्त हो गई। स्थाई नौकरियों में आने की वजह से इसमें से दो शिक्षक चले गए। पडरौना बीआरसी परिसर में चल रहे महज एक एक्सीलेरेटेड लर्निग कैंप के भरोसे दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई हो रही है। यहां नामांकित कुल 60 दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने के लिए एक वार्डेन, तीन केयर टेकर और चार इंटीनरेट टीचर की तैनाती है। संसाधनों और शिक्षकों की कमी के वजह से अधिकांश विद्यालयों में पंजीकृत दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। बीएसए अरुण कुमार ने बताया कि दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई के लिए शासन की तरफ से विशेष शिक्षकों के पद सृजित नही है। दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने के लिए आठ बच्चों पर एक अध्यापक होने चाहिए, लेकिन अभी संविदा के आधार पर विशेष शिक्षक रख कार्य कराया जा रहा है। यदि शासन की तरफ से कोई निर्देश आता है तो उसका अनुपालन कराया जाएगा।

जिले के सभी ब्लॉकों में समेकित अनुभाग की तरफ से 4756 बच्चों का नामांकन है। इनमें से 60 बच्चे पडरौना एक्सीलेरेटेड लर्निंग कैंप में नामांकित है। शेष विभिन्न ब्लॉकों में परिषदीय प्राथमिक और जूनियर स्कूलों और कुछ निजी विद्यालयों में पढ़ाई करते है, लेकिन नियम के मुताबिक इन सभी बच्चों को नियमित रुप से विशेष शिक्षकों के माध्यम से पढ़ाई होनी चाहिए।
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बच्चों की यह श्रेणी
विभाग की तरफ से दिव्यांग बच्चों की तीन श्रेणी बनाई गई। इसमें श्रवण बाधित, दृष्टि बाधित और मानसिक मंदता वाले बच्चों को शामिल किया गया है। दृष्टि बाधिक बच्चों की शिक्षा के क्षेत्र में विकसित होने की अधिक संभावना होती है। दुर्भाग्य यह है कि इस विधा के 11 शिक्षक ही है। श्रवण बाधित बच्चों के शिक्षा क्षेत्र में विकसित होने की क्षमता कम होती है, क्योंकि इनकी श्रवण क्षमता कम होती है। इनको व्यावसायिक शिक्षा में आगे किया जाता है। इस विधा के 15 शिक्षक है। मानसिक मंदता के बच्चों में सर्वाधिक मेहनत करनी पड़ती है। इस विधा के 19 शिक्षक तैनात हैं।
क्या है शिक्षकों की पीड़ा
अस्थाई तौर पर तैनात शिक्षकों की पीड़ा कम नहीं है। इन्हें 14 हजार रुपये मानदेय मिलता है। स्कूल भ्रमण करने के लिए सात सौ रुपये दिए जाते हैं। यह भी बजट पर निर्भर होता है। इससे शिक्षकों को स्कूल भ्रमण करने में परेशानी होती है।

क्या है एक्सीलेरेटेड कैंप
एक्सीलेरेटेड कैंप में दिव्यांग बच्चों को उनके घर से लाकर दाखिला कराया जाता है। यहां आवासीय सुविधा में उन्हें एक वर्ष का विशेष प्रशिक्षण देकर अक्षर का बोध कराकर समान्य विद्यालयों में पढ़ाई करने लायक बनाया जाता है।
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