तमकुहीरोड (कुशीनगर)। बड़ी गंडक नदी में डिस्चार्ज घटने के बावजूद कटान जारी है। एपी बांध के किनारे बसे खैरखुटा गांव पर कटान का खतरा मंडरा रहा है। इसके कारण गांव के लोगों में भय का माहौल बना हुआ है। नदी गांव के रिहायशी इलाके तक पहुंच गई है। इस गांव के लोगों का कहना है कि यदि कटान रोकने का इंतजाम समय रहते नहीं किया गया तो इस गांव के वजूद को बचाना कठिन हो जाएगा।
मानसून सत्र के शुरू हुए बीस दिन बीत चुका है। बावजूद इसके अभी तक अहिरौलीदान के खैरखुटा समेत अन्य संवेदनशील गांवों को गंडक नदी के कटान से बचाने का कोई उपाय ही नहीं किया गया है। स्थिति यह है कि दो दिन पहले जब गंडक नदी में डिस्चार्ज बढ़ा था तो यही लग रहा था कि नदी इस बार इन गांवों के अस्तित्व को मिटा देगी। इससे लोगों में इतनी बेचैनी बढ़ गई कि नदी के किनारे के गांव वालों ने तो अपने जरुरी सामानों को भी समेटना शुरू कर दिया। अब जब वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में डिस्चार्ज घटकर 70 हजार क्यूसेक से भी कम हो गया है, तब भी खैरखुटा गांव के लोग दहशतजदा हैं, क्योंकि नदी के कटान का सिलसिला बदस्तूर जारी है और नदी कटान करती हुई गांव की ओर बढ़ गई है। यही नहीं डिस्चार्ज कम होने के बाद भी बड़ी गंडक नदी ने पूर्व प्रधान मजिस्टर पासवान, गामा चौहान, गौरी शंकर, नन्हू चौहान, अदालत पासवान, जगदीश चौहान, चंद्रेश्वर चौहान, गनेश चौहान के रिहायशी घरों को अपने निशाने पर ले लिया है। इससे चिंतित लोग अब सुरक्षित ठिकानों की तलाश में जुट गए हैं। गांव के लोगों का कहना है कि यह पहला अवसर है, जब नदी का तेज दबाव अहिरौलीदान के कई गांवों पर बना हुआ है। तब भी प्रशासन की ओर से कोई बचाव कार्य अभी तक शुरू नहीं कराया गया है। इसके चलते लोगों में बेचैनी बनी हुई है। गांव के दीनानाथ सिंह, बबलू प्रसाद, रामेश्वर पटेल, संजय सिंह, ओमप्रकाश पटेल, व्यास कुशवाहा, रेयाज हाशमी, जयप्रकाश निषाद, प्रदीप सिंह, शंभू यादव समेत आदि लोगों ने इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कटान रोकने के लिए प्रशासन की तरफ से उपाय किए जाने की मांग की है।