कुशीनगर। तहसील प्रशासन की तरफ से कुछ दिन पहले ही मंगाई गई प्लास्टिक की कुर्सियां व मेज बुधवार को वापस भेज दिए गए। इसकी जानकारी होने पर अधिवक्ताओं ने कमीशन के लिए सामान वापस भेजने का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। एसडीएम ने अधिवक्ताओं को समझा बुझाकर शांत कराया।
खड्डा तहसील में जनता, कर्मचारियों व अधिवक्ताओं की सुविधा के लिए लगभग 50 हजार रुपये खर्च कर प्लास्टिक की कुर्सी-मेज सहित कुछ अन्य सामान मंगाए गए थे। परंतु इस खरीदारी के लिए बनी फाइल पर तहसीलदार खड्डा ने आपत्ति जताई थी। दरअसल, कोटेशन पर कंपनी का नाम व अन्य महत्वपूर्ण जानकारी नहीं थी। इसके साथ ही तहसीलदार ने कागज व फाइलों को सुरक्षित रखने के लिए आलमारी क्रय करने की बात भी लिखी थी। इन आपत्तियों को दरकिनार करते हुए कुछ दिन पहले सामानों की आपूर्ति हो गई और भुगतान के लिए फाइल भी तहसीलदार के सामने पहुंच गई। तहसीलदार ने पहले की आपत्ति दूर नहीं होने का हवाला देते हुए भुगतान करने से मना कर दिया। मामला एसडीएम तक पहुंचा लेकिन बात नहीं बनी और तमाम उठापटक के बाद बुधवार को सभी सामान मालवाहन पर लादकर वापस भेजा जाने लगा। इसकी जानकारी होने पर तहसील बार एसोसिएशन के महामंत्री कुमोद शर्मा, भानू पांडेय, अनूप मिश्रा, अवधेश यादव, दयानंद मणि, अनिल सिंह, अमियमय मालवीय सहित तमाम अधिवक्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया। हंगामा की जानकारी होने पर एसडीएम जयचंद पांडेय ने अधिवक्ताओं को समझा बुझाकर शांत कराया।
इस संबंध में तहसीलदार खड्डा रामकेवल तिवारी का कहना है कि सामानों की खरीदारी के लिए जो पत्रावली उनके सामने आई थी, उस पर उन्होंने कुछ कमियों को इंगित करते हुए अपनी टिप्पणी लिखी थी। बिना उनका निराकरण कराए ये सामान मंगाए गए, जिसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। सामान वापस भेजने की भी उन्हें जानकारी नहीं है।