पडरौना। बाढ़ से बचाव के लिए समय से शासन- प्रशासन यदि चेत जाता तो बड़ी गंडक कत्तई तबाही नहीं मचा पाती। 150 करोड़ की 41 परियोजनाएं स्वीकृति नहीं हुई। जिसकी वजह से नदी की धारा मोड़ने के लिए चिहिन्त जगहों पर समय से ठोकर और स्पर आदि के कार्य नहीं कराए जा सके। नतीजा है कि अहिरौली दान के पांच पुरवे का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। कचहरी टोला, मदरही टोला और नोनियापट्टी के 75 से अधिक घर नदी में समा चुके हैं। करीब 50 से अधिक लोग अपने पक्के मकान को तोड़ चुके है। बांध के किनारे प्लास्टिक की पन्नी तान कर रहने और नाते रिश्तेदारों के घरों पर महिलाओं और बच्चो को पहुंचाने की जुगत में लोग जुटे हुए हैं।
अहिरौली दान के कचहरी टोला निवासी मोहर सिंह, ओम प्रकाश सिंह, श्याम सुंदर सिंह, रवींद्र सिंह ने गांव की तबाही का जिक्र करते हुए अचानक शांत हो गए। बाद में कुरेदने पर बताया कि करीब 15 दिनों से बड़ी गंडक कटान करना शुरु की और एक सप्ताह से तो तबाही मचा रही है। शासन और प्रशासन यदि नोनियापट्टी, खैरखूटा आदि जरुरी जगहों पर ठोकर और स्पर बनाने का कार्य करा दिया होता तो शायद कचहरी टोला, मदरही, खैरखूटा में ऐसी तबाही नहीं मचती। गांव में दो बार मंत्री स्वाति सिंह आई थी और उनसे भी ठोकर और स्पर बनवा कर गांव की सुरक्षा किए जाने की मांग की गई थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। 100 से अधिक लोग अब तक बेघर हो चुके है। जिनके घर टूटे हैं, उन्हें अभी तक पांच मीटर प्लास्टिक की पन्नी तक नहीं मिली है। भूखे तड़पते लोगों का पेट भरने के लिए प्रशासन की ओर से लंगर चलना चाहिए, लेकिन यह भी नहीं हो रहा है। रात में जहरीले सर्प का भी खतरा बढ़ गया है। मिट्टी तेल, कैंडिल और कोटे के अनाज का वितरण पीड़ितों में होना चाहिए। विधायक अजय कुमार लल्लू ने बताया कि अक्टूबर में एक टीम गंडक उच्च स्तरीय स्थाई समिति से जुड़े लोग आए थे और सर्वे करके जिन-जिन परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की थी,उनके लिए बाढ़ खंड की ओर से प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेजा गया। मुख्य तकनीकी सलाहकार समिति ने तो संस्तुति दे दी, लेकिन स्थाई संचालन समिति ने अभी अनुमति प्रदान नहीं की। जिसकी वजह से तैयार परियोजना पर काम नहीं हो पाया। नतीजा यह है कि कचहरी टोला, खैरखूटा अनुसूचित टोला, नोनियापट्टी और कचहरी टोला के लोग तबाही के शिकार हो रहे है। बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए सदन में आवाज उठाएंगे।
बोल्डर, कटर बना कर हो रहा प्रयास
बाढ़ खंड के एक्सईएन भरतराम ने बताया कि गंडक उच्च स्तरीय स्थाई समिति की संस्तुति के बाद जिले में 150 करोड़ की 41 परियोजनाएं तैयार करके शासन को भेजा गया था, लेकिन किसी भी परियोजना की स्वीकृति नहीं मिली। जिसकी वजह से काम नहीं हो पाया। एपी तटबंध पर 13 परियोजनाएं, नटवाजोत पिपरा घाट मार्ग पर पांच परियोजनाएं, अमवाखास तटबंध पर आठ परियोजनाएं और छितौनी तटबंध पर 15 परियोजनाएं तैयार की गई थी। अहिरौलीदान परियोजना के प्लान में तीन जगह ठोकर, किनारा कटिंग आदि काम कराने था। वैसे अभी तक करीब सवा करोड़ उधारी से नोनियापट्टी, खैरखूटा में बोल्डर कटर बनाया जा रहा है। जहां- जहां नदी कटान करने की संभावना है वहां कोशिश की जा रही है कि बचाव कार्य हो जाए। वैसे यदि परियोजनाएं स्वीकृति हुई होती और बरसात से पहले काम हुआ होता तो कचहरी टोला को बचाया जा सकता था। अब बचाव कार्य करने में थोड़ी परेशानी हो रही है। परियोजना स्वीकृति होने पर कार्य कराया जाएगा।