कुशीनगर। अहिरौलीदान गांव के चार टोलों व बिहार के एक गांव को गंडक नदी के प्रकोप से अब केवल खुद नदी ही बचा सकती है। वजह यह कि बाढ़ खंड डिवीजन के पास इन गांवों को बचाने के लिए कोई प्लान ही नहीं बनाया गया है। प्रशासन ने भी इस मामले में रहस्यमय चुप्पी साध रखी है। गंडक नदी के कटान से विवश गांव के लोग अपना आशियाना उजाड़ रहे हैं। बाढ़ खंड डिवीजन के अफसरों का कहना है कि नदी व बांध के बीच बसे इस गांव के सामने कटान रोकने के लिए उनके पास कोई उपाय नहीं है।
गंडक नदी के एपी तटबंध के किनारे बसे अहिरौलीदान गांव के चार टोलों चित्तू टोला, कंचन टोला, डीह टोला और कचहरी टोला के सामने पिछले 10 दिन से कटान हो रहा है। कटान तेज होने के चलते इन टोलों के लोगों में अफरातफरी मची हुई है। चित्तू टोला के सभी लोग अपना सामान समेटकर जा चुके हैं। कंचन टोला और डीह टोला के अधिकांश लोग भी अपना घर उजाड़कर सामान समेत दूसरी जगह शरण ले लिए हैं। विस्थापित हो चुके महातम यादव, विक्रम यादव, रामचंद्र यादव, सिंहासन, उमेश, रामजीत, कोदई, अवध किशोर, कन्हैया आदि का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद प्रशासन या बाढ़ खंड डिवीजन की तरफ से कोई मदद नहीं मिली। इसके अलावा जितेंद्र कुमार सिंह, सुजीत यादव, अरविंद सिंह पटेल, राजालाल, चंद्रिका, बिहारी, दीनानाथ, बलिराम आदि का कहना है कि कटान नहीं रुका तो बाकी लोगों को भी अपना घर खुद ही उजाड़ना होगा।
पिछले तीन साल से इस गांव के सामने कटान हो रहा है, लेकिन बाढ़ खंड डिवीजन के पास कटान रोकने का अब तक कोई प्लान ही नहीं है। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता बीपी सिंह का कहना है कि बांध व नदी के बीच बसे इस गांव के सामने कटान रोकना संभव नहीं है। नदी अपना रास्ता बदल रही है।