गंडक का कटान फिर तेज, दहशत में लोग
गंडक से बिहार के गाइड बांध को भी बढ़ा खतरा
तमकुहीरोड। गंडक ने फिर कटान तेज कर दिया है। जिसकी वजह से अहिरौलीदान के पांच पुरवे के लोग दहशत में हैं। लोग अपने घरों के सामान को सहेज रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ गंडक नदी में बढ़ते- घटते डिस्चार्ज से अब बिहार सीमा क्षेत्र में बने 8.2 किलोमीटर लंबे गाइड बांध पर भी खतरा मडराने लगा है। अहिरौलीदान से सटे और बिशुनपुर तक लगभग 50 गांवों को बाढ़ के खतरे से बचाने के लिए गाइड बांध का निर्माण बिहार सरकार के जरिए 62.8 करोड़ की लागत से पिछले साल ही कराया गया था।
जिस तरह गंडक नदी यूपी सीमा में भारी तबाही के लिए जानी जाती है। उसी तरह बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रो में भी हर साल गंडक कहर बरपाती है। यही कारण है कि पिछले साल अहिरौलीदान से सटा बिहार का भैसही गांव भी गंडक की कटान की भेंट चढ़ गया था और सैकड़ों घर नदी की धारा में समां गए थे। यही नहीं गंडक नदी की विभीषिका के चलते पच्चास से अधिक गांवों के लोगों को भी हर साल भारी तबाही झेलने के लिए विवश होना पड़ता था ।जिन्हें गंडक नदी के प्रकोप से बचाना बिहार के बाढ़ नियंत्रण विभाग के लिए चुनौती बन गया था। इसी लिए बिहार सरकार ने यूपी से सटे अपने काला मटिहिनिया, तिवारी टोला, विशंभरपुर, खेम मटीहिनिया, हरिजन बस्ती, भगवानपुर, रमजिता, बरईपट्टी सहित 50 से अधिक गांवो को बचाने के लिए अहिरौलीदान से बिशुनपुर तक 8.2 किलोमीटर लंबा और 62.8 करोड़ की लागत से गाइड बांध का निर्माण कराया था। इस बांध के निर्माण के लिये नौ गांवों के 298 किसानों की भूमि मुआवजे पर अधिग्रहित की गई थी। इस गाइड बांध के बन जाने के बाद इन गांवों की सुरक्षा तो हो गई है,लेकिन इस साल गंडक द्वारा अहिरौलीदान में भारी तबाही मचाने और गंडक का डिस्चार्ज लगातार घटते बढ़ते रहने के कारण इस गाइड बांध पर भी कटान का खतरा मडराने लगा है।इन गांवो के संतोष पाठक,संजय सिंह,गौतम,प्रदीप, बबलू,सूर्यनाथ,जितेंद्र,शंकर आदि का कहना है कि वैसे तो गाइड बांध काफी मजबूत बना है, लेकिन उन्हें खतरा अहिरौलीदान में एपी बांध के समीप पहुंची गंडक नदी से है। गंडक नदी से यदि यूपी में एपी बांध को खतरा पहुंचता है तो उसका सीधा प्रभाव बिहार के इन गांवों पर भी पड़ेगा और दोनों प्रांत के कई गाँवो के लोगों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। गोपालगंज जिले के बाढ़ नियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता एनके सिंह का कहना है कि यूपी के जिस स्थान से गाइड बांध को खतरा हो सकता है, उस पर पैनी नजर रखी जा रही है।
ुख्य गंडक नहर का पैनल कमजोर होने से किसानों की बढी चिंता
- अधीक्षण अभियंता ने निरीक्षण कर जाना हाल
पिपरा बाजार। किसानों की फसल को सिंचाई की सुविधा के लिए मुफीद मुख्य पश्चिमी गंडक नहर क्षतिग्रस्त होने से चिंता बढा दी है। किसानों का कहना है कि वैसे तो कई जगहों पर नहर की मरम्मत कराने की जरूरत है, लेकिन किलोमीटर 52-59 और 70-74 के बीच जीर्णोद्धार में देरी होने की वजह से नुकसान हो सकता है।
18 अगस्त को विशुनपुरा क्षेत्र में और 20 अगस्त को खड्डा और फिर 30 अगस्त को विशुनपुरा क्षेत्र में नहर का पैनल टूट गया था। सिंचाई विभाग टूटे हिस्सों की मरम्मत करा रहा है, लेकिन पैनल ध्वस्त होने का जैसे सिलसिला शुरू है,उससे हानि होने की ओर इशारा है। वर्ष 1960-70 में बनी नहर से क्षेत्रीय किसानों को सिंचाई की सुविधा मिली। राजवाहा, माईनर और नाली के माध्यम से किसानों के खेतों तक पानी पहुंचा। ड्रेन की वजह से ताल-चंवर में भी फसलें उगाई जाने लगीं। दो नहरों के बीच के खेतों की उर्वरा शक्ति में गुणात्मक सुधार आ गए। वैसे सिंचाई विभाग नहर के टूटे हुए हिस्सों की मरम्मत करा रहा है। परगन छपरा और सेखुई मिश्र गांवों के समीप टूटे पैनल का मुआयना करने शुक्रवार को अधीक्षण अभियंता अरुण कुमार पहुंचे। अधीक्षण अभियंता अरुण कुमार ने कहा कि नहर के जीर्णोद्धार की कोशिश की जाएगी। चूंकि परियोजना बड़ी है, अत: शासन की सहमति के उपरांत ही कार्य शुरु किया जा सकता है।