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50 में 37 शुद्ध पेयजल परियोजनाएं अधूरीं

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अधूरा पड़ा बबुईया हरपुर का ओवर हैंड टैंक। संवाद न्यूज एजेंसी। - फोटो : KUSHINAGAR
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50 में 37 शुद्ध पेयजल परियोजनाएं अधूरीं
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47 करोड़ 24 लाख रुपये मिले तो साकार हो शुद्ध पेयजल मुहैया कराने का सपना
सिर्फ पांच ओवरहेड टैंकों से शुरू हो पाई है पानी की आपूर्ति, पांच पर चल रहा ट्रॉयल
तीन ओवरहेड टैंकों को विद्युत कनेक्शन मिलने का इंतजार
राकेश कुमार गौंड़
पडरौना। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल मिशन के तहत जनपद में स्वीकृत ग्रामीण पाइप पेजयल परियोजनाओं में सिर्फ पांच ही पूरी हो पाईं हैं। इनसे पेयजल आपूर्ति शुरू हो गई है, शेष परियोजनाओं को पूर्ण करने के लिए अभी 47 करोड़ 24 लाख 18 हजार रुपये की आवश्यकता है। हालांकि, पांच परियोजनाओं पर ट्रॉयल चल रहा है, जबकि तीन को सिर्फ विद्युत कनेक्शन का मिलने का इंतजार है। इसके अलावा कई ऐसी ग्रामीण पाइप पेयजल परियोजनाएं हैं, जो छह साल पहले शुरू हुईं थीं, लेकिन उनसे भी पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। ऐसी दशा में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी पानी खरीदकर पीना पड़ता है अथवा इंडिया मार्क टू हैंडपंप या साधारण हैंडपंप पर निर्भर रहना पड़ता है।
जनपद में भूगर्भ जल का प्रथम लेयर दूषित हो चुका है। इसकी वजह से शासन के निर्देश पर प्रशासन ने साधारण हैंडपंपों के उपयोग पर रोक लगा दी। दूषित पेयजल के चलते यह जनपद इंसेफेलाइटिस के लिहाज से बेहद संवेदनशील रहा है। इस बीमारी से मरने वाले मासूमों की संख्या एक साल में 100 को पार कर जाती थी। इस साल जनवरी से अब तक इंसेफेलाइटिस के 18 केस आ चुके हैं, जिसमें एक की मौत हुई है। इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए पहले इंडिया मार्क टू हैंडपंप और उसके बाद ओवरहेड टैंक एवं टीटीएसपी (टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट) का निर्माण तेजी से शुरू हुआ। जनपद में पिछले वित्तीय वर्ष 2019-20 में 29 ग्रामीण पाइप पेयजल परियोजनाएं स्वीकृत थीं। उन परियोजनाओं पर निर्माण चल ही रहा था कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में भी 21 और परियोजनाओं की स्वीकृति मिल गई थी। इस तरह दो वित्तीय वर्षों में इन 50 परियोजनाओं को पूर्ण कराने के लिए 13975.82 लाख (एक अरब उनतालीस करोड़ पचहत्तर लाख 82 हजार) रुपये की आवश्यकता थी। विभाग के मुताबिक इस धनराशि के सापेक्ष शासन की तरफ से उपलब्ध कराए गए 9251.64 लाख (बानबे करोड़ इक्यावन लाख चौसठ हजार) रुपये से पांच परियोजनाएं सेवरही क्षेत्र के तरयासुंदर, बनवरिया व बहिराबारी, कसया के अंध्या और तमकुही के माधोपुर बुजुर्ग में पूर्ण कराकर पेयजल आपूर्ति शुरू कराई जा चुकी हैं। तमकुही क्षेत्र के सरया बुजुर्ग, विशुनपुरा के पुर्नहा मिश्र, मठिया माधोपुर, पडरौना क्षेत्र के सिसवा मठिया और कप्तानगंज क्षेत्र के सिंदुरिया विशुनपुर सहित पांच परियोजनाओं का ट्रॉयल चल रहा है, जबकि तीन परियोजनाओं में विद्युत कनेक्शन दिया जाना बाकी है। शेष 37 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। इन अधूरे कार्यों को पूर्ण कराने के लिए 4724.18 लाख (सैंतालिस करोड़ चौबीस लाख अठारह हजार) रुपये की आवश्यकता है। (संवाद)
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ढांचा बनकर रह गया है ओवरहेड टैंक
फाजिलनगर क्षेत्र के महासोन निवासी अरविंद त्रिपाठी बताते हैं कि इस गांव में एक करोड़ रुपये की लागत से लगभग साढ़े चार हजार लीटर की क्षमता का ओवरहेड टैंक वर्ष 2016 से बनकर तैयार है, लेकिन पाइप और टोटियां नहीं लगाए जाने से पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। यदि पानी की आपूर्ति होती तो लगभग सात हजार लोग इससे लाभान्वित होते।
महासोन निवासी अंशुमान ने बताया कि पूर्व में यह गांव इंसेफेलाइटिस प्रभावित रहा है। वाटर टैंक लगने की योजना आई तो शीघ्र गांव में शुद्ध पेयजल मिलने की उम्मीद जगी, लेकिन गांव में अभी तक पेयजल आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी।
ओवरहेड टैंक बना, लेकिन पाइप बिछी अधूरी
विशुनपुरा ब्लॉक के गंभीरिया निवासी बबलू कुशवाहा बताते हैं कि इस गांव में ओवरहेड टैंक छह साल से बनकर तैयार है, लेकिन पाइप आधी-अधूरी बिछाए जाने से पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इस वजह से पानी ज्यादातर लोग इंडिया मार्क टू हैंडपंप से या खरीदकर पीते हैं।
गंभीरिया निवासी शकीम अंसारी ने बताया कि ओवरहेड टैंक बनते समय गांव के लोगों को शुद्ध पेयजल को लेकर बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन शुद्ध पानी मिलना अब भी मुश्किल है।
बबुइयां हरपुर निवासी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उमाशंकर मिश्र कहते हैं कि विशुनपुरा ब्लॉक की सबसे बड़ी इस ग्राम पंचायत में पिछले कई वर्षों से ओवरहेड टैंक निर्माणाधीन है। इधर, एक वर्ष से निर्माण कार्य ठप है। कई बार जल निगम के अफसरों से कहा गया, लेकिन निर्माण पूरा नहीं हुआ।
1.64 करोड़ खर्च, फिर भी नहीं मिला शुद्ध पानी
पकड़ियार बाजार निवासी तफारुद्दीन बताते हैं कि इस बाजार में 1.64 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 14 में ओवरहेड टैंक का निर्माण शुरू हुआ था। वर्ष 2017 में वह पूर्ण हो गया। विद्युत कनेक्शन भी लग गया, लेकिन पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हुई। इस वजह से पानी खरीदकर पीना पड़ता है।
कांग्रेसी नेता जितेंद्र कन्नौजिया बताते हैं कि गांव में लगे अधिकतर इंडिया मार्क टू हैंडपंप खराब पड़े हैं, जो चल रहे हैं वह भी दूषित जल दे रहे हैं। ओवरहेड टैंक से पानी की आपूर्ति कब शुरू होगी यह भी कहा नहीं जा सकता। स्वच्छ पानी के लिए परेशान होना पड़ता है।
अधूरा है ओवरहेड टैंक
बनकटा बाजार के निवर्तमान प्रधान प्रतिनिधि मैनेजर गुप्ता बताते हैं कि बाजार में ओवरहेड टैंक का निर्माण वर्ष 2018 में शुरू हुआ था। निर्माण पूर्ण होने पर पाइपलाइन बिछा दी गई, लेकिन अभी तक कनेक्शन देने की तैयारी चल रही है। ऐसे में लोगों को शुद्ध पेयजल के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
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कोट
पिछले दो वित्तीय वर्षों में जितनी भी पेयजल परियोजनाएं स्वीकृत हुईं, धनावंटन के अनुरूप उन्हें पूर्ण कराकर पेयजल आपूर्ति शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है। पांच परियोजनाएं पूर्ण करा दी गई हैं। पांच पर ट्रॉयल चल रहा है, जबकि तीन को इस माह के अंत तक विद्युतीकरण कराकर आपूर्ति शुरू करा दी जाएगी। अधूरी परियोजनाओं के लिए 47 करोड़ 24 लाख 18 हजार रुपये की आवश्यकता है। कुछ परियोजनाएं कई वर्ष पुरानी हैं, जो हमारे कार्यकाल की नहीं हैं। फिर भी उनकी पाइपलाइन व अन्य कमियों को दूर कराकर पेयजल आपूर्ति शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है।
-प्रमोद कुमार गौतम, एक्सईएन, जलनिगम
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