माथा कुंवर मंदिर में हुआ जलभराव, श्रद्धालु परेशान
पुरातात्विक अवशेषों के स्वरूप में परिवर्तन होने का अंदेशा
फोटो है।
अमर उजाला ब्यूरो
कसया। कुशीनगर स्थित माथा कुंवर मंदिर परिसर में बरसात का पानी भर गया है। इससे न केवल मंदिर में पूजा अर्चना के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को दिक्कतें हो रही हैं, बल्कि इस पुरातात्विक धरोहर को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बढ़ गई है।
कुशीनगर में मिले पुरातात्विक महत्व के अवशेषों की सुरक्षा, स्वच्छता और संरक्षित करने की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग की है। इसके लिए कुशीनगर में वरिष्ठ संरक्षण अधिकारी की तैनाती की गई है। इसके बावजूद भी इन महत्वपूर्ण स्थलों की देखभाल में लापरवाही बरती जा रही है। मुख्य मंदिर के अलावा रामाभार स्तूप जाने वाले मार्ग स्थित माथा कुंवर मंदिर परिसर में बरसात का पानी भर गया है, लेकिन जल निकासी का अब तक कोई प्रबंध नहीं किया गया है। जानकारों का मानना है कि दोनों स्थलों को सुरक्षित करने के लिए विभाग की तरफ से कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया तो पुरातात्विक अवशेष के स्वरूप में परिवर्तन हो सकता है।
इस संबंध में वरिष्ठ पुरातत्व संरक्षण अधिकारी इंजीनियर पंकज तिवारी का कहना है कि इसकी जानकारी विभागीय उच्चाधिकारियों को दी जा चुकी है। वैसे माथा कुंवर मंदिर और रामाभार स्तूप परिसर से बरसात का पानी को निकालने के लिए जल्द प्रबंध करा दिया जाएगा।
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क्यों महत्वपूर्ण है इसका संरक्षण-
इस मंदिर में स्थापित 11वीं सदी की भू-स्पर्श मुद्रा वाली बुद्ध प्रतिमा 1876 की पुरातात्विक खुदाई में यहीं प्राप्त हुई थी। मंदिर के सामने पुरातात्विक अवशेष भी उसी समय मिले थे। मंदिर और परिसर का धरातल काफी नीचे होने के चलते यहां बरसात का पानी भर गया है। सड़क से मंदिर जाने के लिए संपर्क मार्ग पर भी घुटनों तक पानी भर गया है। इसके चलते इन दिनों यहां आने वाले अधिकांश पर्यटक मंदिर में दर्शन नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि कुछ पर्यटक पानी से ही होकर मंदिर तक जाते हैं, लेकिन उन्हें पानी में फिसलकर गिरने का भय बना रहता है।
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सफाई के नाम पर होती है औपचारिकताएं
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग प्रत्येक वर्ष मंदिर में अधिक पानी भर जाने पर पंपिंगसेट से पानी निकालने का प्रयास करता है, लेकिन इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। पुरातात्विक अवशेषों से पानी निकालने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।