पडरौना। दुदही ब्लॉक के केबरा भुआलपट्टी गांव में मनरेगा से कराए गए कार्यों में सरकारी धन का बंदरबांट का मामला सामने आया है। आरटीआई से मिली सूचना के बाद मनरेगा में घोटाला करने की पोल खुली है। किसानों की शिकायत पर डीएम ने जांच का निर्देश दिया है।
गांव में जांच करने पहुंची ब्लॉक स्तरीय टीम ने जहां जमीन समतल होना कागज में दिखाया गया है, वहां का स्थलीय निरीक्षण किया, उसी तरह बगीचा और टीला है। आसपास के लोगों ने बताया कि यहां की जमीन कभी समतल नहीं हुई है।
कुबेरा भुआल पट्टी गांव निवासी शारदा मिश्र और इनके भाई धनश्याम मिश्र का गांव में बगीचा है। दोनों लोगों से बगीचे के समतलीकरण के लिए प्रधान बैंक पासबुक, आधार कार्ड करीब एक साल पूर्व लिए थे, लेकिन जमीन समतल नहीं हो सकी, लेकिन इस काम के नाम पर 2.80 लाख रुपये का भुगतान करा लिया गया।
गांव के प्रवीण मिश्रा ने आरटीआई के तहत हुए विकास कार्यों की सूचना मांगी, करीब 17 माह बाद अधिकारियों से बार-बार शिकायत करने के बाद आधी अधूरी सूचना सचिव ने उपलब्ध कराई। इससे पता चला कि गांव के शारदा मिश्र और धनश्याम मिश्र के बगीचे का समतलीकरण हुआ नहीं है। भुगतान मनरेगा के तहत करा लिया गया है। दोनों भाईयों ने डीएम से मिलकर इसकी शिकायत की। डीएम ने जांच का निर्देश दिया।
गांव में दुदही ब्लॉक के मनरेगा एपीओ अरविंद कुशवाहा जांच के लिए गांव में पहुंचे। स्थलीय सत्यापन के बाद मौके पर कोई काम होना नहीं पाया गया। गांव वालों ने भी काम नहीं होने का बयान दिया है। इसके अलावा आरोप है कि अपात्रों को आवास देने व बिना बनवाए सड़क निर्माण पर भुगतान कराया गया है। शिकायत करने वाले भाईयों पर समझौते के लिए दबाव बनाया जा रहा है। यही वजह है कि करीब बीस दिन पूर्व हुई शिकायत की जांच आख्या अभी तक नहीं आ सकी है।
वहीं ग्राम प्रधान मुन्नी देवी के प्रतिनिधि नरेंद्र गुप्ता ने बताया कि गांव के कुछ लोग शिकायत किए हैं। इस आधार पर जांच चल रही है। सचिव की ओर से मनमानी की गई है। इससे मेरा कोई ताल्लुक नहीं है।
एपीओ मनरेगा, दुदही अरविंद कुशवाहा ने कहा कि बगीचे की जमीन समतल नहीं कराई गई है। मनरेगा से हुए भुगतान में इसी जमीन की खतौनी और मालिकाना हक वाले दो किसानों का आधार कार्ड लगाया गया है। गांव वालों ने भी अपने बयान में बताया कि यहां मनरेगा से कोई कार्य नहीं हुआ है। इसकी रिपोर्ट बीडीओ को जल्द सौंप दी जाएगी।