पडरौना। सात वर्षों से बंद पड़ी पडरौना चीनी मिल में संभावनाएं तलाशने शुक्रवार को कानपुर की एक टीम पहुंची। हुबली इंटर प्राइजेज कानपुर की इस दो सदस्यीय टीम ने चीनी मिल के कलपुर्जों और इसकी चल-अचल संपत्ति का मुआयना करने के बाद मजदूर नेताओं और कर्मचारियों से मिलकर बकाया देयों के बारे में ब्योरा लिया। इस टीम ने बताया कि मिल चलाने को मिले तो अभी भी है पेराई शुरू करने की गुंजाइश संभव है।
पिछले सात वर्षों से बंद पड़ी इस चीनी मिल को चलाने के लिए कई बार धरना प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के अलावा यह मामला विधानसभा में भी उठ चुका है। यही नहीं इस चीनी मिल को चलवाने के लिए तहसील प्रशासन की ओर से नीलामी की 28 बार तारीखें पड़ चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद नीलामी की प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो पाई। इस चीनी मिल से मजदूर, कर्मचारी और किसान अपना बकाया भुगतान पाने के लिए उम्मीद लगाए बैठे हैं।
शुक्रवार को हुबली इंटरप्राइजेज कानपुर की दो सदस्यीय टीम जिसमें डीपी सिंह और एपी सिंह शामिल थे, दोपहर करीब साढ़े बारह बजे पडरौना चीनी मिल पहुंचे। इनके आने की सूचना पर चीनी मिल के मजदूर और कर्मचारी भी पहुंच गए। टीम के दोनों सदस्यों ने बकाया गन्ना मूल्य भुगतान, मजदूरों और कर्मचारियों का बकाया भुगतान, गन्ना का बकाया कमीशन आदि के बारे में विस्तार से जानकारी ली।
ओमप्रकाश लाल श्रीवास्तव ने उन्हें बताया कि इस चीनी मिल में 31 स्थाई और 199 मौसमी कर्मचारी हैं। इनके वेतन का 4.76 करोड़, पीएफ का एक करोड़ आठ लाख और ग्रेच्युटी का सवा चार करोड़ रुपये बाकी है। इसके अलावा अन्य सभी देयों को मिलाकर मजदूरों और कर्मचारियों का करीब 11 करोड़ रुपये बकाया है। इसके अलावा गन्ना मूल्य लगभग 12.49 करोड़ रुपये बाकी है। इसी तरह गन्ना कमीशन भी लगभग 45 लाख रुपये बाकी है।
हुबली इंटरप्राइजेज की तरफ से डीपी सिंह ने बताया कि उनकी कंपनी फैक्ट्रियों के स्क्रैप और प्लांट खरीदती है। मिलों की स्थिति ठीक मिलने प उनकी रिपेयरिंग कराकर संचालित कराती है। इस चीनी मिल का मुआयना किया गया। मिल की कंडीशन ठीक है। यदि यह मिल उनकी कंपनी को मिलती है तो मरम्मत कराकर चलाई जा सकती है।
87 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है इसकी संपत्ति
जनवरी महीने में जहां इस चीनी मिल की नीलामी 68 करोड़ 19 लाख आठ हजार सात सौ रुपये से शुरू हुई थी, वह मिल की संपत्ति के मूल्यांकन के बाद बढ़कर 87 करोड़ 92 लाख 97 हजार 951 रुपये तक पहुंच गई है।