फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बाढ़ पीड़ितों में 55 लाख 47 हजार रुपये का आर्थिक सहयोग

विज्ञापन
विज्ञापन
गंडक से बेघर लोगों को अब भी मदद का इंतजार
विज्ञापन

बांध पर शरण लेने को मजबूर हैं बाढ़ पीड़ित
फोटो के साथ
बारिश में टपकता है तिरपाल से पानी, जाग कर गुजारते हैं रात
24 घंटे में एक बार जलता है चूल्हा, सुरक्षा का भी बना रहता है खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
तमकुहीरोड। गंडक की कटान अभी भी हो रही है। अहिरौलीदान के कचहरी टोला और खैरखूटा के पास गंडक का दबाव बना हुआ है। अहिरौली दान के पांच पुरवों में गंडक ने तबाही मचाई। सर्वाधिक प्रभावित कचहरी टोला रहा है। करीब 150 परिवार बेघर हो गए। इनमें तमाम परिवार सरकारी मदद से वंचित हैं और बांध के किनारे प्लास्टिक की पन्नी तान कर गुजारा कर रहे हैं। ये लोग प्रशासन से मदद की आस लगाए हैं।
विज्ञापन

पांच अगस्त को गंडक ने अहिरौलीदान के कचहरीटोला, नोनियापट्टी, मदुरही, खैरखुटा और दलित बस्ती में कटान शुरू की थी। 150 से अधिक लोगों के मकान या तो नदी की कटान की जद में आ गए या फिर लोगों ने तोड़ डाला और ईंट को सुरक्षित जगह रखवा दिया। 150 से अधिक परिवारों के सिर से छत छिन गई और प्रभावित लोगों को एपी बांध, परिषदीय स्कूल और बाढ़ राहत केंद्रों पर शरण लेनी पड़ी। तहसील प्रशासन ने क्षति का आंकलन कराने के पश्चात भुटेली, गामा, हरिकृष्ण, धुरंधर, चंद्रिका, रामनरेश, बांके बिहारी, गया समेत 57 लोगों को 95100 रुपये प्रति घर की दर से 54 लाख 20 हजार 700 रुपये की सरकारी मदद मुहैया कराई थी। इसी तरह जिन लोगों के कच्चे मकान बर्बाद हुए थे, उनमें गौरीशंकर, विरेश, फूलकुमारी, माया देवी, योगेंद्र, सुबाष, बिंदा समेत 31 लोगों को 4100 रुपये की दर से एक लाख 27 हजार 100 रुपये की मदद दी गई थी। कुल 88 प्रभावित परिवारों में 55 लाख, 47 हजार 800 रुपये बांटे जा चुके हैं। बावजूद इसके, लोगों का आरोप है कि जब सूची तैयार की जा रही थी तो उस सूची में सभी 150 प्रभावित परिवारों के नाम दर्ज कराए गए थे, लेकिन बाद में बहुत लोगों का नाम सूची से गायब कर दिया गया और मात्र 88 लोगों को ही सरकारी मदद मुहैया कराई गई है। जबकि शेष लोगों को इस लाभ से वंचित कर दिया गया है। इसके चलते आज भी कई परिवार हैं, जो सुविधा से वंचित होकर एपी बांध पर शरण लिए हुए हैं। सरकारी सुविधा से वंचित सुशील, मंटू, हरेंद्र, प्रेम चंद, कुसुम, सच्चिदानंद, भरत, राजमति देवी बताती हैं कि बारिश होने पर तो पूरी रात जाग कर बितानी पड़ती है। 24 घंटे में एक बार भी भोजन मिल जाए तो जान में जान आ जाती है। इन लोगों ने भी तहसील प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। एसडीएम प्रमोद कुमार ने बताया कि सूची के मुताबिक मुआवजे का वितरण करा दिया गया है। यदि कोई नाम छूट गया है तो जांच कराई जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें