पडरौना। सरकारी तंत्र के संवेदनहीन रवैया ने गंडक नदी के किनारे बसी करीब एक लाख की आबादी को चिंता में डाल दिया है। वजह यह है कि बरसात का मौसम शुरू होने में 10 दिन से भी कम समय बचा है और गंडक नदी के तटबंधों की मरम्मत के लिए बनी पौने तीन अरब की 46 परियोजनाओं को अब तक अंतिम मंजूरी नहीं मिल पाई है। यह हालत तब है जब खुद बाढ़ प्रबंधन मंत्री इस बांध का दौरा कर बचाव कार्य समय से पूर्ण कराने की बात कह चुकी हैं।
गंडक नदी के किनारे करीब 100 किलोमीटर लंबा बांध है। महराजगंज जिले की सीमा से शुरू छितौनी बांध से लेकर बिहार प्रांत की सीमा तक एपी तटबंध की हालत जर्जर है। गंडक नदी पिछले बरसात में बरवापट्टी गांव के सामने अमवा तटबंध के पास पहुंच चुकी है। एपी तटबंध पर जंगलीपट्टी समेत कई गांवों के सामने कटान पूरे वर्ष चलता रहा है। बिहार सीमा से सटे अहिरौलीदान गांव के पांच टोले बीते तीन वर्षों में कट चुके हैं। इस साल भी नदी बाकी हिस्से को काटने में लगी है।
बाढ़ खंड विभाग ने छितौनी, अमवा और एपी बांध पर बचाव कार्य के लिए कुल 46 परियोजनाएं बनाई थी। नवंबर में इन परियोजनाओं पर गंडक हाई लेवल कमेटी में चर्चा हो चुकी है। विभागीय जानकारी के मुताबिक फरवरी में स्थाई संचालन समिति की बैठक में इनकी मंजूरी देते हुए बजट आवंटित होना था, लेकिन यह कार्य पूरा नहीं हो पाया। जिन 46 परियोजनाओं को मंजूरी नहीं दी गई, उनमें से 26 परियोजनाएं ऐसी हैं जिन्हें विभाग ने प्रथम वरियता देते हुए तत्काल बचाव कार्य शुरू कराने की जरूरत बताई थी। सिंचाई विभाग के बाढ़ खंड डिवीजन के एक्सईएन भरत राम का कहना है कि गंडक नदी के कटान से बांधों की सुरक्षा के लिए बनी कार्य योजनाओं पर बजट के अभाव में कार्य प्रभावित हो रहा है।