कसया। देवरिया के बालगृह बालिका कांड के बाद बुधवार को 24 लोगों को लाकर कुशीनगर में यूपी भारती विकास संस्थान की तरफ से संचालित कसया वृद्धाश्रम में शिफ्ट कराया गया था। इनका स्वास्थ्य परीक्षण सीएचसी अधीक्षक डॉ. अरुण कुमार पांडेय की अगुवाई में तीन सदस्यीय चिकित्सकों की टीम ने किया था। 22 लोगों की मानसिक और शारीरिक हालत ठीक न बताते हुए मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया था। इनमें 20 महिलाएं और 2 पुरुष शामिल थे।
सीएमओ डॉ. हरिचरण सिंह ने बृहस्पतिवार को बुजुर्गों को 108 नंबर के वाहन से बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर भेजवाया, वहां पर कॉलेज प्रशासन ने कुछ घंटे वार्डों में रखा। वृद्धाश्रम के डायरेक्टर दिनेश मिश्र ने बताया कि मेडिकल कॉलेज पहुंचाए गए 22 लोगों में किसी को कोई ट्रीटमेंट और किसी तरह की चिकित्सकीय सुविधा नहीं दी गई। अलबत्ता यह कहकर जल्द कॉलेज से ले जाने के लिए कह दिया गया कि यहां पर मेडिकल की पढ़ाई होती है, न कि मानसिक रोगियों का इलाज अथवा शेल्टर होम है। कॉलेज के इस तल्ख व्यवहार से आहत वृद्धाश्रम के कर्मियों ने सीएमओ डॉ. हरिचरण सिंह और जिला समाज कल्याण अधिकारी को अवगत कराया, इस पर फिर 22 बुजुर्गों को कुशीनगर वापस लाया। उनमें से लाते समय रास्ते में आठ की हालत चिंताजनक देखकर जिला अस्पताल में भर्ती कराकर उचित देखभाल किया गया। हालात सामान्य होने पर शनिवार को फिर जिला अस्पताल से वृद्धाश्रम कसया शिफ्ट करा दिया गया। वृद्धाश्रम प्रबंधन ने बताया कि पहले से रह रहे 89 वृद्धों में से 14 अपने घरों को चले गए हैं। इससे इनकी देखभाल में सहूलियत मिल रही है।